भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की सुस्ती अब किसानों की चिंता बढ़ाने लगी है। प्रदेश के 55 में से 48 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज होने से कई इलाकों में सूखे जैसे हालात बन गए हैं। कुछ जिलों में बारिश की कमी 46 फीसदी तक पहुंच गई है। इसका असर जलाशयों के साथ-साथ खरीफ फसलों पर भी दिखाई देने लगा है।
पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में औसत से करीब 23 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग में भी सामान्य से करीब 16 फीसदी कम वर्षा हुई है।
बारिश नहीं होने से कई इलाकों में खेतों की नमी तेजी से कम हो रही है और फसलों की बढ़वार प्रभावित होने लगी है।
धान, सोयाबीन और मक्का पर सबसे ज्यादा असर
मानसून की बेरुखी का सबसे ज्यादा असर धान, सोयाबीन और मक्का की फसलों पर पड़ रहा है।
जबलपुर के पाटन क्षेत्र में धान के खेतों में नमी कम होने से दरारें पड़ने लगी हैं। वहीं शाजापुर और उज्जैन संभाग के कई इलाकों में सोयाबीन की फसल कमजोर पड़ रही है।
कम नमी के बीच कुछ क्षेत्रों में इल्ली और यलो मोजेक वायरस का प्रकोप भी बढ़ने की शिकायतें सामने आई हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों की उत्पादकता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
किसानों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर खेती की है। ऐसे में बारिश की कमी से फसल प्रभावित हुई तो आर्थिक नुकसान बढ़ सकता है। प्रभावित किसानों ने खेतों का सर्वे कराने, कृषि विशेषज्ञों से तकनीकी सलाह उपलब्ध कराने और जरूरत के अनुसार दवाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
सिर्फ 7 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
प्रदेश में अब तक केवल बड़वानी, ग्वालियर, भिंड, बुरहानपुर, देवास, खंडवा और खरगोन ऐसे जिले हैं, जहां सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है।
इसके विपरीत अधिकांश जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। इससे खेती के साथ जलस्रोतों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ रही है।
अगले 3 दिन बारिश से मिल सकती है राहत
मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों के दौरान मध्य प्रदेश के उत्तरी हिस्सों सहित कुछ अन्य क्षेत्रों में बारिश की संभावना जताई है।
श्योपुर, मुरैना, शिवपुरी, गुना, टीकमगढ़, छतरपुर और सागर में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर समेत कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।
यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश होती है तो खेतों में नमी लौटने से खरीफ फसलों को राहत मिल सकती है। हालांकि जिन इलाकों में फसलें पहले ही गंभीर रूप से प्रभावित हो चुकी हैं, वहां किसानों की चिंता बनी हुई है।
किसानों की नजर अब आसमान पर
मानसून के कमजोर पड़ने से मध्य प्रदेश के किसानों की नजर अब अगले कुछ दिनों की बारिश पर टिकी है। समय पर बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों की लागत निकालना भी मुश्किल हो सकता है। वहीं अच्छी बारिश होने पर फसलों को दोबारा संभलने का मौका मिल सकता है।


