ध्यानाकर्षण में विधायक अजय सिंह ने टोल कंपनियों के मुनाफे को लेकर सरकार से मांगा जवाब
भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में भोपाल–देवास, लेबड़–जावरा और जावरा–नयागांव टोल सड़क परियोजनाओं को लेकर सरकार विपक्ष के निशाने पर रही। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने विधायक अजय सिंह के ध्यानाकर्षण के लिखित जवाब में बताया कि तीनों परियोजनाओं की मूल लागत करीब 1360 करोड़ रुपये थी, जो 31 मार्च 2026 तक बढ़कर 7818.57 करोड़ रुपये हो गई है। इसी अवधि में इन परियोजनाओं से 7225.76 करोड़ रुपये की टोल वसूली भी की जा चुकी है।
सरकार के अनुसार, जावरा–नयागांव परियोजना की कुल लागत 2873.95 करोड़ रुपये और टोल वसूली 2684.60 करोड़ रुपये रही। भोपाल–देवास परियोजना की लागत 1934.02 करोड़ रुपये जबकि टोल से 2104.88 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। वहीं लेबड़–जावरा परियोजना की लागत 3010.60 करोड़ रुपये और टोल वसूली 2436.28 करोड़ रुपये दर्ज की गई।
ध्यानाकर्षण के दौरान विधायक अजय सिंह ने पूछा कि 20 दिसंबर 2024 को नोएडा ब्रिज मामले में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अध्ययन विभाग ने किया है या नहीं। इस पर मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि नोएडा ब्रिज और मंदसौर ब्रिज से जुड़े सर्वोच्च न्यायालय के फैसले उनके विशिष्ट तथ्यों और अनुबंधों की शर्तों पर आधारित हैं, इसलिए उन्हें इन तीनों टोल परियोजनाओं पर लागू नहीं किया जा सकता।
सरकार के जवाब पर असंतोष जताते हुए अजय सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने दोनों मामलों में अनुबंध की शर्तों के बावजूद परियोजना लागत की लगभग दोगुनी टोल वसूली के बाद टोल समाप्त करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि जावरा–नयागांव परियोजना का अनुबंध वर्ष 2007 में हुआ था, जबकि सरकार ने 2006 का उल्लेख किया है। उनके अनुसार तीनों परियोजनाओं के अनुबंध लगभग 30 दिनों के अंतराल में हुए थे और लेबड़–जावरा परियोजना में लागू कुछ शर्तों को बाद की 53 टोल परियोजनाओं में शामिल ही नहीं किया गया।
900-900 करोड़ में बेचे गये टोल कंपनियों के शेयर
अजय सिंह ने आरोप लगाया कि तीनों टोल कंपनियों के शेयर करीब 900-900 करोड़ रुपये में बेचे गए। उन्होंने दावा किया कि भोपाल–देवास टोल कंपनी के एक शेयर का मूल्य नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने 1.26 लाख रुपये निर्धारित किया है, जबकि कंपनी ने वर्ष 2024-25 और 2025-26 में 10 रुपये अंकित मूल्य वाले प्रत्येक शेयर पर 10 हजार रुपये से अधिक की आय दर्शाई है। उनके अनुसार अन्य दोनों कंपनियों की स्थिति भी इसी तरह की है, इसके बावजूद सरकार टोल समाप्त करने पर विचार नहीं कर रही।
कांग्रेस विधायक ने सरकार से यह भी पूछा
विधायक ने सरकार से यह भी पूछा कि तीनों कंपनियों की स्थापना से लेकर वर्ष 2025-26 तक की ऑडिट रिपोर्ट का अनुबंध के अनुरूप विश्लेषण किया गया या नहीं। उन्होंने प्रत्येक वर्ष के ऑपरेटिंग प्रॉफिट, आयकर, सीएसआर व्यय, विभिन्न ऋणों पर जून 2026 तक चुकाए गए ब्याज, प्रमोटर्स की 26 प्रतिशत अनिवार्य हिस्सेदारी समाप्त होने के कारण, शेयरों की खरीद-बिक्री, विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी और निवेशकों को दिए गए लाभांश का पूरा ब्यौरा भी मांगा। उनका आरोप है कि सरकार ने अपने लिखित उत्तर में इन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई।


