भोपाल। तीन दिन से राजधानी भोपाल में जारी किसानों के उग्र आंदोलन और बढ़ते राजनीतिक दबाव के आगे आखिरकार मोहन सरकार को झुकना पड़ा। किसानों की दो प्रमुख मांगों पर सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए मूंग की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी की सीमा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दी। वहीं, खाद वितरण के लिए लागू ई-टोकन व्यवस्था को भी तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया। सरकार ने स्लॉट बुकिंग और मूंग उपार्जन की अंतिम तिथि भी बढ़ा दी है।

बुधवार को किसान प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के बाद कृषि मंत्री ऐंदल सिंह कंषाना ने फैसलों की घोषणा करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने इस वर्ष ग्रीष्मकालीन मूंग उपार्जन के लिए मध्य प्रदेश को 4.52 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य दिया था। केंद्र की योजना के तहत कुल उत्पादन का अधिकतम 25 प्रतिशत एमएसपी पर खरीदा जाना था, लेकिन किसानों के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए अब प्रत्येक पात्र किसान से उसकी मूंग उपज का 60 प्रतिशत तक उपार्जन किया जाएगा। नर्मदापुरम, हरदा और सीहोर जैसे प्रमुख उत्पादक जिलों में यह मात्रा करीब तीन क्विंटल प्रति एकड़ तक होगी।
स्लॉट बुकिंग और खरीदी की अवधि भी बढ़ी
सरकार ने किसानों को राहत देते हुए स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 30 जुलाई से बढ़ाकर 10 अगस्त कर दी है। इसके साथ ही मूंग उपार्जन की अंतिम तिथि भी 10 अगस्त से बढ़ाकर 20 अगस्त कर दी गई है, ताकि अधिक से अधिक किसान अपनी उपज एमएसपी पर बेच सकें।
ई-टोकन व्यवस्था फिलहाल बंद
खाद वितरण में लागू ई-टोकन व्यवस्था को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों और व्यावहारिक कठिनाइयों के बाद सरकार ने इसे तत्काल प्रभाव से स्थगित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी, जो पूरी व्यवस्था की समीक्षा कर सुधार संबंधी सुझाव देगी। समिति की रिपोर्ट आने और आवश्यक सुधार लागू होने तक खाद वितरण पुरानी व्यवस्था के अनुसार होगा।
सीएम हाउस की ओर बढ़े किसान, पुलिस से झड़प
सरकार के फैसले से पहले राजधानी भोपाल में आंदोलन उस समय और उग्र हो गया, जब प्रदर्शनकारी किसानों ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के आवास का घेराव करने के बाद मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच किया। एमपी नगर और रोशनपुरा क्षेत्र में पुलिस ने बैरिकेडिंग कर किसानों को रोकने की कोशिश की, जिसके दौरान पुलिस और किसानों के बीच धक्का-मुक्की हुई। इस दौरान कुछ किसानों के कपड़े भी फट गए।
प्रदर्शन के दौरान कई किसानों ने अर्धनग्न होकर विरोध जताया, जबकि कुछ किसानों ने सड़क पर ही दाल-बाटी बनाकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। आंदोलन के समर्थन में युवाओं ने हवन भी किया। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर कई मार्गों पर यातायात डायवर्ट किया गया और नर्मदापुरम रोड स्थित सरकारी एवं निजी स्कूलों में अवकाश घोषित करना पड़ा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार किसानों से संवाद के माध्यम से हर समस्या का समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार ने किसानों की जायज मांगें तब मानीं, जब आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया।
किसानों को क्या मिली राहत?
सरकार के 5 बड़े फैसले
- मूंग की एमएसपी खरीदी 25% से बढ़ाकर 60%।
- स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 10 अगस्त तक।
- मूंग उपार्जन की अंतिम तिथि 20 अगस्त तक बढ़ी।
- खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था तत्काल स्थगित।
- ई-टोकन व्यवस्था की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित।
तीन दिन में ऐसे बदले हालात
- पहला दिन: मूंग की 100% खरीदी और खाद की ई-टोकन व्यवस्था खत्म करने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू।
- दूसरा दिन: प्रदेशभर में प्रदर्शन तेज, सरकार पर दबाव बढ़ा।
- तीसरा दिन: भोपाल में किसानों ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के आवास और मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच किया। पुलिस से झड़प, अर्धनग्न प्रदर्शन और सड़क पर दाल-बाटी बनाकर विरोध।
- शाम: किसान प्रतिनिधियों से चर्चा के बाद सरकार ने मूंग खरीदी 60% करने, ई-टोकन व्यवस्था स्थगित करने और खरीदी की अवधि बढ़ाने की घोषणा कर दी।


