अशरफ अली
भोपाल/सीहोर। महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर सीहोर में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने संघ के पंजीकरण, फंडिंग और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि देश में किसी भी संस्था, समिति या संगठन के संचालन के लिए पंजीकरण, सदस्यता और बैंक खाते जैसी प्रक्रियाएं अनिवार्य होती हैं, लेकिन RSS का कोई आधिकारिक रजिस्ट्रेशन नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि यदि संगठन पंजीकृत नहीं है तो उसके पास आने वाला धन कहां जाता है और उसका लेखा-जोखा किस प्रकार रखा जाता है।
मोहन भागवत के बयान पर कांग्रेस का पलटवार
RSS प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, जिसमें उन्होंने कहा था कि “हिंदू धर्म भी रजिस्टर्ड नहीं है”, दिग्विजय सिंह ने कहा कि हजारों वर्ष पुराने हिंदू धर्म की तुलना किसी संगठन के पंजीकरण से नहीं की जा सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के तर्क देकर संघ अपने ऊपर उठ रहे सवालों से बचने की कोशिश कर रहा है।
धर्म और आस्था के नाम पर राजनीति का आरोप
कांग्रेस नेता ने कहा कि देश में धर्म और आस्था के नाम पर राजनीति की जा रही है, जबकि बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की समस्याओं जैसे मूल मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।
RSS Registration को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
दरअसल, कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने हाल ही में RSS के पंजीकरण और फंडिंग को लेकर सवाल उठाए थे। इसके जवाब में मोहन भागवत ने कहा था कि संघ को रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं है और यह मुद्दा केवल राजनीतिक विवाद खड़ा करने के लिए उठाया जा रहा है। खरगे ने संघ से उसके वित्तीय स्रोतों और संगठनात्मक संरचना को लेकर कई सवाल पूछे हैं।
सीहोर में दिए गए दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद RSS और कांग्रेस के बीच सियासी बहस एक बार फिर तेज हो गई है।


