भोपाल। दतिया विधानसभा उपचुनाव में चुनाव प्रचार समाप्त होने के साथ ही अब मुकाबला घर-घर संपर्क और बूथ मैनेजमेंट के अंतिम दौर में पहुंच गया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने प्रचार के आखिरी चरण में पूरी ताकत झोंक दी। अब दोनों दल अपने समर्थकों को मतदान केंद्र तक पहुंचाने और हर बूथ पर मजबूत प्रबंधन के जरिए बढ़त बनाने की रणनीति में जुट गए हैं। दतिया में 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि मतगणना 3 अगस्त को की जाएगी।
प्रचार के अंतिम दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रोड शो कर भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में पैदल जनसंपर्क कर मतदाताओं से समर्थन मांगा। दोनों दलों के व्यापक प्रचार अभियान के बावजूद मतदाताओं की चुप्पी ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है।
करीब 2.20 लाख मतदाताओं वाली दतिया विधानसभा सीट पर जातीय समीकरण चुनाव की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं। क्षेत्र में लगभग 40 हजार दलित, 35 हजार कुशवाहा, 28 हजार ब्राह्मण और 15 हजार यादव मतदाता हैं। इसके अलावा राजपूत, दांगी, मुस्लिम, कायस्थ, सिंधी तथा वैश्य समाज के मतदाता भी चुनावी परिणाम पर प्रभाव डालने की स्थिति में हैं।
इस चुनाव में विकास कार्य, स्थानीय समस्याएं, सरकार की योजनाएं और प्रत्याशियों की व्यक्तिगत छवि जैसे मुद्दे भी चर्चा में रहे, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों की नजर सबसे अधिक जातीय समीकरण और बूथ प्रबंधन पर टिकी हुई है।
भाजपा की रणनीति
भाजपा 2023 के विधानसभा चुनाव में मिली हार की भरपाई के लक्ष्य के साथ मैदान में है। पार्टी ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाकर विकास कार्यों, मेडिकल कॉलेज, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया। संगठन ने बूथ स्तर तक मजबूत नेटवर्क खड़ा किया है। ग्वालियर सांसद भारत सिंह कुशवाह को चुनाव प्रभारी बनाया गया है, जबकि प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी उप प्रभारी के रूप में चुनाव संचालन संभाल रहे हैं। उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, पूर्व मंत्री इमरती देवी और वरिष्ठ नेता डॉ. अरविंद भदौरिया भी लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहे।
कांग्रेस का भरोसा स्थानीय मुद्दों पर
कांग्रेस ने प्रत्याशी घनश्याम सिंह की व्यक्तिगत छवि और स्थानीय जनसरोकारों को चुनावी अभियान का आधार बनाया। किसानों, युवाओं, रोजगार और स्थानीय समस्याओं को प्रमुख मुद्दा बनाते हुए पार्टी ने भ्रष्टाचार के आरोपों को भी जनता के बीच उठाया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने भी चुनावी रणनीति को धार देने में सक्रिय भूमिका निभाई।
अब बूथ मैनेजमेंट पर नजर
प्रचार थमने के बाद अब दोनों दलों की पूरी नजर घर-घर संपर्क और बूथ प्रबंधन पर है। चुनावी विशेषज्ञों का मानना है कि इस करीबी मुकाबले में वही दल बढ़त हासिल करेगा, जो अपने समर्थकों को अधिक संख्या में मतदान केंद्र तक पहुंचाने में सफल रहेगा। ऐसे में 30 जुलाई का मतदान दतिया की राजनीतिक दिशा तय करेगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना के साथ उपचुनाव के नतीजे सामने आएंगे।


