भोपाल/दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। यह सीट एक बार फिर जातीय समीकरणों, वोट बैंक की रणनीति और बड़े नेताओं की राजनीतिक वापसी की वजह से चर्चा में आ गई है। खासकर पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की सक्रियता और संभावित भूमिका को लेकर राजनीतिक हलकों में गहरी हलचल देखी जा रही है।
दतिया सीट पर मुख्य मुकाबला सिर्फ दलों के बीच नहीं बल्कि वोट बैंक और संगठनात्मक पकड़ के आधार पर माना जा रहा है।
ओबीसी वोट बैंक सबसे बड़ा निर्णायक फैक्टर
दतिया विधानसभा क्षेत्र में सबसे बड़ा वोट बैंक अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का माना जा रहा है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 53 प्रतिशत तक बताई जाती है।
ओबीसी वर्ग में शामिल प्रमुख समुदाय-यादव, कुशवाहा-काछी, लोधी, बघेल-पाल, अन्य पिछड़ा वर्ग-
कुल मिलाकर ओबीसी मतदाताओं की संख्या करीब 95 हजार मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस वर्ग में जिस पार्टी की पकड़ मजबूत होगी, जीत उसकी संभावना बढ़ जाएगी।
ब्राह्मण और अहिरवार समाज निर्णायक स्थिति में
दतिया में ब्राह्मण और अहिरवार/चमार समाज दो सबसे बड़ी एकल जातियां हैं, जिनकी संख्या लगभग 33-33 हजार बताई जा रही है।
ब्राह्मण समाज भाजपा का पारंपरिक आधार माना जाता है, जिसमें नरोत्तम मिश्रा की मजबूत पकड़ रही है
अहिरवार समाज कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक माना जाता है
इन दोनों वर्गों का रुझान चुनाव परिणाम बदल सकता है।
नरोत्तम मिश्रा की भूमिका और राजनीतिक प्रभाव
दतिया की राजनीति में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा लंबे समय से सबसे प्रभावशाली चेहरों में रहे हैं। 2023 विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद उनकी संगठनात्मक पकड़ और स्थानीय स्तर पर सक्रियता बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, उपचुनाव से पहले नरोत्तम मिश्रा लगातार कार्यकर्ताओं से संवाद कर रहे हैं और क्षेत्र में राजनीतिक समीकरण मजबूत करने की कोशिश में जुटे हुए हैं। माना जा रहा है कि दतिया में भाजपा की रणनीति और वोट बैंक को साधने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
सामान्य वर्ग भी तय करेगा परिणाम
दतिया में सामान्य वर्ग के मतदाताओं की संख्या करीब 60 हजार है, जिसमें शामिल हैं-
ब्राह्मण, राजपूत, बनिया, कायस्थ, सिंधी-यदि यह वर्ग किसी एक दल के पक्ष में एकजुट होता है तो चुनाव का परिणाम एकतरफा भी हो सकता है।
अनुसूचित जाति और मुस्लिम वोट बैंक भी अहम
अनुसूचित जाति के मतदाता करीब 58 हजार हैं, जिनमें अहिरवार, जाटव, कोरी, वाल्मीकि और खटीक समुदाय शामिल हैं।
इसके अलावा मुस्लिम मतदाता लगभग 8 हजार हैं, जो कांटे की टक्कर में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
कांग्रेस में टिकट को लेकर भीषण संघर्ष
कांग्रेस खेमे में टिकट को लेकर जबरदस्त अंदरूनी खींचतान चल रही है।
प्रमुख दावेदार
राजेन्द्र भारती अपने बेटे अनुज को टिकट दिलाने के प्रयास में
अवधेश नायक टिकट के मजबूत दावेदार, पुराने राजनीतिक विवाद भी चर्चा में
घनश्याम सिंह का नाम भी रेस में शामिल
कांग्रेस में यह मुकाबला संगठन के भीतर गहरी दरार को दर्शा रहा है।
राजनीतिक समीकरण: जाति + नेतृत्व + रणनीति
विशेषज्ञों के अनुसार दतिया में जीत सिर्फ जातीय आधार पर नहीं तय होगी, बल्कि—
ओबीसी वोट बैंक का झुकाव
ब्राह्मण और SC वोट का संतुलन
नरोत्तम मिश्रा जैसे नेताओं की सक्रियता
कांग्रेस की अंदरूनी एकता या बिखराव
ये सभी फैक्टर मिलकर चुनाव परिणाम तय करेंगे।
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