भोपाल। नर्मदा जल विवाद और सरदार सरोवर परियोजना को लेकर मध्य प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस द्वारा राज्य सरकार पर मध्य प्रदेश के हितों से समझौता करने के आरोप लगाए जाने के बाद मप्र भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा है कि कांग्रेस जनता को भ्रमित कर रही है और तथ्य छिपा रही है।
भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल का कहना है कि फरवरी 2026 में भारत के अटॉर्नी जनरल की कानूनी राय के अनुसार सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े वित्तीय दायित्व के मामले में मध्य प्रदेश पर गुजरात को लगभग 1,500 करोड़ रुपये का भुगतान करने की स्थिति बन रही थी। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल के मार्गदर्शन में चारों राज्यों के बीच सहमति बनी।
श्री अग्रवाल के अनुसार इस सहमति के बाद मध्य प्रदेश की संभावित देनदारी घटकर केवल 231.80 करोड़ रुपये रह गई। पार्टी का कहना है कि इससे प्रदेश के लगभग 1,268 करोड़ रुपये की बचत हुई और करीब 30 वर्षों से लंबित विवाद का समाधान संभव हो सका।
प्रदेश मीडिया प्रभारी ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी से सवाल करते हुए श्री अग्रवाल ने कहा कि संभावित 1,500 करोड़ रुपये की देनदारी को घटाकर 231.80 करोड़ रुपये करना प्रदेशहित के खिलाफ कैसे हो सकता है। पार्टी का दावा है कि यह फैसला मध्य प्रदेश के आर्थिक हितों की रक्षा करने के साथ-साथ सहकारी संघवाद और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय का उदाहरण है।
भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी का यह भी कहना है कि इस समझौते से नर्मदा जल, सिंचाई और बिजली से जुड़े लाभ भविष्य में भी प्रदेश को मिलते रहेंगे। वहीं कांग्रेस लगातार सरकार पर नर्मदा परियोजना और राज्य के जल अधिकारों से समझौता करने के आरोप लगा रही है। इस मुद्दे पर दोनों दलों के दावों के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है।


