भोपाल। MonsoonSkinCare बारिश के मौसम में रैशेज, खुजली, फंगल इंफेक्शन और त्वचा पर छोटे-छोटे घाव होना आम है। लगातार नमी और पसीने के कारण त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत कमजोर हो सकती है, जिससे बैक्टीरिया और फंगस के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। खासकर गंदे या सीवेज मिले बारिश के पानी के संपर्क में आने से त्वचा में संक्रमण की आशंका और बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, मानसून में छोटी खरोंच, कट, कीड़े के काटने या त्वचा में पड़ी दरार को भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। इन रास्तों से बैक्टीरिया त्वचा की गहरी परतों में पहुंच सकते हैं और सेल्युलाइटिस (Cellulitis) का कारण बन सकते हैं।
क्या है सेल्युलाइटिस?
सेल्युलाइटिस त्वचा की गहरी परतों और उसके नीचे मौजूद ऊतकों में होने वाला बैक्टीरियल इंफेक्शन है। शुरुआत में प्रभावित हिस्से पर लाल निशान दिखाई दे सकता है, लेकिन संक्रमण बढ़ने पर त्वचा गर्म, सूजी हुई और दर्दनाक हो सकती है। समय पर उपचार न मिलने पर संक्रमण रक्तप्रवाह या लिम्फ नोड्स तक फैल सकता है और गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।
सेल्युलाइटिस के प्रमुख लक्षण
त्वचा के किसी हिस्से में लालिमा
प्रभावित जगह का छूने पर गर्म महसूस होना
दर्द, जलन और सूजन
त्वचा में खिंचाव या कसाव
लालिमा का धीरे-धीरे फैलना
बुखार और ठंड लगना
कमजोरी या अत्यधिक थकान
इनमें से कई लक्षण दिखाई देने पर खुद से इलाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
किन लोगों को ज्यादा खतरा?
सेल्युलाइटिस किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसका जोखिम अधिक रहता है। इनमें शामिल हैं—
डायबिटीज से पीड़ित लोग
खुले घाव वाले लोग
कीड़े या जानवर के काटने से घायल लोग
एक्जिमा जैसी त्वचा संबंधी समस्या वाले लोग
पैरों में लंबे समय से सूजन रहने वाले लोग
कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग
बुजुर्ग
मोटापे से ग्रस्त लोग
जिन लोगों को पहले सेल्युलाइटिस हो चुका है
बारिश के गंदे पानी से रहें सावधान
अगर बारिश का पानी सीवेज या गंदे पानी के साथ मिल गया है, तो उसमें मौजूद बैक्टीरिया त्वचा के संक्रमण का कारण बन सकते हैं। ऐसे पानी में जाने से बचना बेहतर है। मजबूरी में गुजरना पड़े तो बाहर निकलने के बाद पैरों और प्रभावित हिस्सों को साफ पानी और साबुन से अच्छी तरह धोएं।
छोटी चोट या खरोंच को भी तुरंत साफ करके साफ पट्टी से ढकें। घाव को गंदे हाथों से न छुएं और न ही उसे बार-बार खुजलाएं।
अगर चोट के आसपास लालिमा, गर्माहट, सूजन या दर्द बढ़ने लगे तो डॉक्टर से संपर्क करें। घाव को दबाने, काटने या खुद से फोड़ने की कोशिश न करें। बुखार, कंपकंपी या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।
हाथ-पैर की त्वचा का रखें खास ख्याल
सेल्युलाइटिस शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है, लेकिन हाथ और पैरों में इसके मामले अधिक देखे जाते हैं। पैरों में फंगल इंफेक्शन, खुजली और त्वचा की दरारें बैक्टीरिया के लिए शरीर में प्रवेश का रास्ता बन सकती हैं।
डायबिटीज के मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्हें रोज अपने पैरों की जांच करनी चाहिए और उंगलियों के बीच, तलवों तथा एड़ी के आसपास किसी भी घाव, दरार या छाले पर नजर रखनी चाहिए।
डायबिटीज में पैरों की संवेदनशीलता कम हो सकती है, जिसके कारण छोटी चोट का तुरंत पता नहीं चलता। ऐसे घावों को ठीक होने में भी अधिक समय लग सकता है। इसलिए पैरों की नियमित जांच और साफ-सफाई बेहद जरूरी है।
कब तुरंत डॉक्टर को दिखाएं?
यदि त्वचा पर लालिमा तेजी से फैल रही हो, प्रभावित हिस्सा अधिक गर्म और सूज रहा हो, दर्द बढ़ रहा हो या इसके साथ बुखार, कंपकंपी और अत्यधिक कमजोरी महसूस हो रही हो, तो इसे सामान्य रैश या एलर्जी मानकर नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में जल्द डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।


