भारतीय हॉकी के इतिहास में मध्यप्रदेश की पहचान हमेशा जादुई और कलात्मक हॉकी खेल के लिए रही है। खासकर भोपाल को भारतीय हॉकी की नर्सरी कहा जाता है, जिसने देश को अनेक अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी दिए हैं। यह गौरवशाली परंपरा आज भी कायम है। राज्य हॉकी अकादमी लगातार ऐसी नई प्रतिभाओं को तराश रही है, जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन करने के लिए तैयार हैं। यूथ हॉकी एशियन चैंपियनशिप-2026 के लिए भारतीय टीम में मध्यप्रदेश राज्य हॉकी अकादमी के आयुष रजक, करण गौतम, महक परिहार और नौशीन नाज़ का चयन इसी निरंतरता और सफलता का प्रमाण है।
20 से 25 जुलाई तक ओमान के मस्कट में होने वाली इस प्रतियोगिता में पुरुष और महिला, दोनों वर्गों में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों की बराबर भागीदारी प्रदेश की सुदृढ़ खेल नीति, उत्कृष्ट प्रशिक्षण व्यवस्था और वर्षों से किए जा रहे सुनियोजित निवेश का परिणाम है। यह उपलब्धि केवल चार खिलाड़ियों की व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि पूरे खेल तंत्र की सामूहिक उपलब्धि है।
इन खिलाड़ियों ने हाल ही में जापान में आयोजित अंडर-18 एशिया कप में भी अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया था। भारतीय पुरुष टीम ने खिताब जीता, जबकि महिला टीम ने कांस्य पदक अपने नाम किया। महिला टीम की फॉरवर्ड नौशीन नाज़ ने पूरे टूर्नामेंट में 12 गोल कर सर्वाधिक गोल करने वाली खिलाड़ी का गौरव हासिल किया। यह उपलब्धि बताती है कि भारतीय हॉकी का भविष्य मजबूत और प्रतिभाशाली हाथों में है।
हालांकि, ऐसी सफलताओं को केवल सम्मान समारोहों और बधाइयों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। खिलाड़ियों को आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं, अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव, वैज्ञानिक कोचिंग और आर्थिक सुरक्षा लगातार उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है। अक्सर देखा गया है कि शुरुआती सफलता के बाद संसाधनों की कमी खिलाड़ियों की प्रगति में बाधा बन जाती है। यदि इस चुनौती का समाधान किया जाए, तो मध्यप्रदेश आने वाले वर्षों में भारतीय हॉकी का सबसे बड़ा प्रतिभा केंद्र बन सकता है।
यह संतोष का विषय है कि प्रदेश की खेल अकादमियां अब केवल खिलाड़ी नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के विजेता तैयार कर रही हैं। यह मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है। मस्कट में होने वाली यूथ हॉकी एशियन चैंपियनशिप केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की खेल संस्कृति, प्रशिक्षण प्रणाली और प्रतिभा विकास की परीक्षा भी होगी।
आशा है कि प्रदेश के ये चारों खिलाड़ी अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से भारत को पदक दिलाने के साथ-साथ देशभर के युवाओं को यह संदेश भी देंगे कि यदि प्रतिभा को सही मार्गदर्शन, बेहतर अवसर और निरंतर समर्थन मिले, तो विश्व मंच पर सफलता हासिल करना असंभव नहीं है।


