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    Semiconductor 2.0: भारत में चिप निर्माण को मिलेगी रफ्तार, सरकार ने ₹1.27 लाख करोड़ की योजना को दी मंजूरी

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    नई दिल्ली। भारत को सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने देश में चिप निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए ‘Semiconductor 2.0’ योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत करीब ₹1.27 लाख करोड़ का बजटीय आवंटन किया गया है। इसका उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर की पूरी वैल्यू चेन को विकसित करना है।

    चिप निर्माण से डिजाइन और टेस्टिंग तक पूरा इकोसिस्टम होगा मजबूत

    Semiconductor 2.0 के तहत चिप उद्योग से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों को वित्तीय और तकनीकी सहायता देने पर जोर दिया गया है। इसमें एडवांस सेमीकंडक्टर डिजाइन, चिप निर्माण, पूंजीगत उपकरण, भारी मशीनरी, सेमीकंडक्टर फैब और पैकेजिंग-टेस्टिंग सुविधाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।
    इसके अलावा ATMP/OSAT जैसी अत्याधुनिक असेंबली, पैकेजिंग और टेस्टिंग सुविधाओं को भी योजना के दायरे में शामिल किया गया है। इससे देश में चिप निर्माण के साथ-साथ उससे जुड़ी सहायक इंडस्ट्री को भी विस्तार मिलने की उम्मीद है।

    भारत में विकसित होगी ‘संप्रभु सेमीकंडक्टर तकनीक’

    सरकार का फोकस भारत में एक भरोसेमंद, लचीली और संप्रभु सेमीकंडक्टर तकनीक विकसित करने पर है। इसका मकसद रणनीतिक और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाली तकनीक और चिप्स के लिए विदेशी निर्भरता को कम करना है।

    राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सेमीकंडक्टर IP, चिप्स, सिस्टम-ऑन-चिप (SoC) और एडवांस मॉड्यूल्स के डिजाइन, विकास और तैनाती को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

    कंप्यूटिंग, मेमोरी और सेंसर के लिए घरेलू IP पर जोर

    योजना के तहत भारत में अलग-अलग तकनीकी जरूरतों के लिए मानक और स्वदेशी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) विकसित करने पर भी जोर रहेगा। इनमें कंप्यूटिंग, मेमोरी, RF, पावर, नेटवर्किंग और सेंसर से जुड़े तकनीकी ब्लॉक शामिल हैं।
    घरेलू स्तर पर इन तकनीकों के विकास से भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिल सकती है। साथ ही इससे भारत का सेमीकंडक्टर डिजाइन और निर्माण इकोसिस्टम और मजबूत होने की उम्मीद है।

    रक्षा और संवेदनशील क्षेत्रों में घटेगी विदेशी निर्भरता

    Semiconductor 2.0 के जरिए सरकार चिप वैल्यू चेन के अलग-अलग स्तरों पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इससे रक्षा, संचार और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में विदेशी तकनीक और आपूर्ति पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

    सरकार की कोशिश भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में एक भरोसेमंद, आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की है।

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