फूड इंफ्लेशन 5.32% पर पहुंची; बढ़ती कीमतों से ब्याज दरों में इजाफे की आशंका
नई दिल्ली। देश में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) लगातार छठे महीने बढ़ी है। जून 2026 में महंगाई दर बढ़कर 4.38% पर पहुंच गई, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के मध्य लक्ष्य से ऊपर है। इससे पहले मई में खुदरा महंगाई 3.93% और जनवरी में 2.74% दर्ज की गई थी।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, खाने-पीने की वस्तुओं, खासकर आलू और अदरक जैसी आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी महंगाई बढ़ने की प्रमुख वजह रही। वहीं, सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।
फूड इंफ्लेशन बढ़कर 5.32% हुआ
जून में खाद्य महंगाई (Food Inflation) बढ़कर 5.32% पर पहुंच गई, जबकि मई में यह 4.38% थी। खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम लोगों के घरेलू बजट पर पड़ रहा है।
RBI पर बढ़ सकता है ब्याज दर बढ़ाने का दबाव
हालांकि महंगाई अभी भी RBI के 2% से 6% के टॉलरेंस बैंड के भीतर है, लेकिन लगातार बढ़ती कीमतें केंद्रीय बैंक पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बना सकती हैं। यदि ऐसा होता है, तो आने वाले महीनों में लोन महंगे हो सकते हैं और आर्थिक विकास की रफ्तार भी प्रभावित हो सकती है।
RBI ने पहले ही अल नीनो के कारण कमजोर मानसून और बढ़ती ऊर्जा कीमतों को देखते हुए वित्त वर्ष के लिए महंगाई का अनुमान 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया था।
नए महंगाई इंडेक्स के कारण पिछले साल से तुलना संभव नहीं
सरकार ने जनवरी 2026 से 2024 को बेस ईयर मानकर नया महंगाई इंडेक्स लागू किया है। इसी वजह से मौजूदा आंकड़ों की तुलना पिछले वर्ष की समान अवधि से नहीं की जा सकती।
नए इंडेक्स के अनुसार जनवरी में महंगाई 2.74%, फरवरी में 3.21%, मार्च में 3.40%, अप्रैल में 3.48%, मई में 3.93% और जून में 4.38% रही।
खर्च के नए पैटर्न पर आधारित है नया इंडेक्स
महंगाई का नया इंडेक्स हाउसहोल्ड कंजम्पशन एक्सपेंडिचर सर्वे 2023-24 पर आधारित है। इसमें लोगों के बदलते खर्च के पैटर्न के अनुसार विभिन्न वस्तुओं का वेटेज संशोधित किया गया है। आवश्यक वस्तुओं की हिस्सेदारी बढ़ाई गई है, जबकि अत्यधिक उतार-चढ़ाव वाले खाद्य पदार्थों का वेटेज कुछ कम किया गया है।


