वाशिंगटन। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बताया है। हालांकि, ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के असर को देखते हुए IMF ने वर्ष 2026 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि (GDP Growth) का अनुमान मामूली घटाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया है। वहीं, 2027 के लिए विकास दर का अनुमान बढ़ाते हुए कहा है कि ऊर्जा संबंधी दबाव कम होने पर भारत की अर्थव्यवस्था और गति पकड़ेगी।
2026 की ग्रोथ में मामूली कटौती, 2027 का अनुमान बढ़ाया
IMF की ताजा World Economic Outlook रिपोर्ट के अनुसार, भारत की 2026 की विकास दर के अनुमान में अप्रैल की तुलना में 0.1 प्रतिशत अंक की कटौती की गई है। वहीं, 2027 के लिए अनुमान 0.2 प्रतिशत अंक बढ़ाया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मजबूत घरेलू मांग और उम्मीद से बेहतर आर्थिक गतिविधियां भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रही हैं।
भारत ने वैश्विक अनिश्चितताओं का बेहतर सामना किया
IMF के अधिकारियों ने कहा कि भारत ने दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में वैश्विक अनिश्चितताओं और आर्थिक चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना किया है। हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा की बढ़ती कीमतें इस वर्ष आर्थिक विकास पर कुछ दबाव डाल सकती हैं।
ऊर्जा संकट का असर अस्थायी, अगले साल मिलेगी राहत
IMF के रिसर्च विभाग की प्रमुख डेनिज इगन ने कहा कि हाल के आर्थिक आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे हैं और हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर भी भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा कीमतों में वृद्धि का असर फिलहाल विकास दर पर पड़ा है, लेकिन 2027 में इसके कम होने की उम्मीद है। IMF का अनुमान है कि मध्यम अवधि में भारत की आर्थिक वृद्धि दर लगभग 6.5 प्रतिशत के आसपास बनी रह सकती है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और महंगाई पर भी नजर
IMF ने 2026 के लिए वैश्विक आर्थिक विकास दर का अनुमान 3 प्रतिशत और 2027 के लिए 3.4 प्रतिशत पर लगभग बरकरार रखा है।
साथ ही, वैश्विक महंगाई (Headline Inflation) का अनुमान बढ़ाकर 4.7 प्रतिशत कर दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2024 की शुरुआत से महंगाई में गिरावट का जो रुझान था, उसमें फिलहाल ठहराव आया है।
AI निवेश से वैश्विक अर्थव्यवस्था को सहारा
रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में तेजी से बढ़ रहा निवेश ऊर्जा की ऊंची कीमतों से होने वाले आर्थिक नुकसान की आंशिक भरपाई कर रहा है। इससे वैश्विक टेक्नोलॉजी वैल्यू चेन से जुड़े देशों को लाभ मिलने की संभावना है।
भारत के लिए तेल की कीमतें क्यों अहम हैं?
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर महंगाई, चालू खाते के घाटे और आर्थिक विकास पर पड़ता है।
यदि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल आपूर्ति लंबे समय तक प्रभावित होती है, तो भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और घरेलू ईंधन कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका रहेगी।


