नई दिल्ली । भारत का राजकोषीय घाटा मई 2026 के अंत तक चालू वित्त वर्ष 2026-27 के बजट लक्ष्य का 9.6 प्रतिशत पहुंच गया है। मंगलवार को जारी केंद्र सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में राजकोषीय घाटा 1.62 लाख करोड़ रुपये रहा। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह केवल 13,163 करोड़ रुपये या बजट अनुमान का 0.8 प्रतिशत था।
नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीजीए) के आंकड़ों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 4.3 प्रतिशत, यानी 16.96 लाख करोड़ रुपये का राजकोषीय घाटा लक्ष्य निर्धारित किया है। शुरुआती दो महीनों के आंकड़े बताते हैं कि सरकारी खर्च में तेज बढ़ोतरी और राजस्व संग्रह की अपेक्षाकृत धीमी रफ्तार के कारण वित्तीय दबाव बढ़ा है।
कर और गैर-कर राजस्व का प्रदर्शन
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मई के अंत तक करों से शुद्ध प्राप्तियां 3.48 लाख करोड़ रुपये रहीं, जबकि गैर-कर राजस्व 3.51 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इस दौरान केंद्र सरकार का कुल व्यय 8.81 लाख करोड़ रुपये रहा, जिसमें 2.51 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय भी शामिल है।
खर्च बढ़ने से बढ़ा घाटा
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि अप्रैल-मई के दौरान सरकारी खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। विशेष रूप से सब्सिडी और ब्याज भुगतान बढ़ने से राजस्व व्यय में 20.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं पूंजीगत व्यय में 13.4 प्रतिशत का विस्तार हुआ, जिससे बुनियादी ढांचे और आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
टैक्स कलेक्शन की रफ्तार रही धीमी
सरकार का सकल कर राजस्व अप्रैल-मई के दौरान सालाना आधार पर केवल 1.8 प्रतिशत बढ़ा। पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क से होने वाली आय में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट इसका प्रमुख कारण रही। हालांकि कॉर्पोरेट टैक्स और सीमा शुल्क संग्रह में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई, लेकिन आयकर संग्रह केवल 6.8 प्रतिशत बढ़ा, जो बजट अनुमान के अनुरूप आवश्यक 17.7 प्रतिशत की वृद्धि से काफी कम है।
कच्चे तेल की कीमतों से मिल सकती है राहत
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत की वित्तीय स्थिति को आने वाले महीनों में राहत मिल सकती है। इसी वजह से अब विशेषज्ञों का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में केंद्र का राजकोषीय घाटा सरकार के 4.3 प्रतिशत जीडीपी के लक्ष्य के आसपास ही रह सकता है।
आगे की चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार के सामने आने वाले महीनों में विकास कार्यों की गति बनाए रखते हुए राजकोषीय अनुशासन कायम रखने की बड़ी चुनौती होगी। यदि राजस्व संग्रह में तेजी आती है और कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं, तो सरकार के लिए निर्धारित राजकोषीय घाटा लक्ष्य के करीब रहना संभव हो सकता है।
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