व्यक्तिगत करदाताओं का योगदान भी बढ़ा; सरकार के वार्षिक लक्ष्य की ओर तेज़ रफ्तार
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष में भारत सरकार के प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) संग्रह में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आयकर विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 13 जुलाई 2026 तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 16.40 प्रतिशत बढ़कर 6.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इस वृद्धि में कॉरपोरेट टैक्स की उल्लेखनीय भूमिका रही है, जिससे सरकार के राजस्व संग्रह को मजबूती मिली है।
कॉरपोरेट टैक्स में 22% की शानदार वृद्धि
आंकड़ों के अनुसार, शुद्ध कॉरपोरेट कर संग्रह में 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है और यह बढ़कर 2.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। कंपनियों के बेहतर वित्तीय प्रदर्शन और आर्थिक गतिविधियों में तेजी के चलते कॉरपोरेट टैक्स संग्रह में यह उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली।
व्यक्तिगत करदाताओं का योगदान भी बढ़ा
गैर-कॉरपोरेट कर (Non-Corporate Tax) संग्रह, जिसमें व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) और फर्मों द्वारा चुकाया गया आयकर शामिल है, करीब 12 प्रतिशत बढ़कर 3.84 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इससे स्पष्ट है कि व्यक्तिगत करदाताओं का योगदान भी लगातार मजबूत हो रहा है।
1.22 लाख करोड़ रुपये का रिफंड जारी
सरकार ने इस अवधि में 1.22 लाख करोड़ रुपये से अधिक का टैक्स रिफंड भी जारी किया है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 14.57 प्रतिशत अधिक है।
वहीं, सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह (Gross Direct Tax Collection) 16.11 प्रतिशत बढ़कर 7.73 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया। इसमें 3.35 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कॉरपोरेट टैक्स और 4.12 लाख करोड़ रुपये का गैर-कॉरपोरेट टैक्स शामिल है।
सरकार के लक्ष्य की ओर सकारात्मक संकेत
केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रत्यक्ष कर संग्रह का लक्ष्य 26.97 लाख करोड़ रुपये रखा है, जो पिछले वित्त वर्ष के 23.40 लाख करोड़ रुपये के संग्रह से लगभग 15 प्रतिशत अधिक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा कर संग्रह की रफ्तार सरकार के बजटीय लक्ष्य हासिल करने की दिशा में सकारात्मक संकेत दे रही है। यह देश में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों, कॉरपोरेट लाभ और आयकर अनुपालन में सुधार का भी संकेत है।


