मध्यप्रदेश में बाल विवाह की समस्या अब सिर्फ लड़कियों तक सीमित नहीं रही। NFHS-6 (नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे) की ताजा रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश में हर 100 पुरुषों में से 25 की शादी 21 साल की कानूनी उम्र से पहले हो चुकी है। वहीं, लड़कियों के मामले में यह प्रतिशत 20% है। यह राष्ट्रीय औसत 15.9% से करीब 9 प्रतिशत अधिक है, जो संकेत करता है कि अब लड़के भी बाल विवाह की चपेट में हैं।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के आंकड़े इस चिंता को और बढ़ा देते हैं। ग्रामीण इलाकों में 28% पुरुषों और 23.4% महिलाओं की शादी कानूनी उम्र से पहले हो रही है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा क्रमशः 16.2% और 9% है। यह स्पष्ट करता है कि परंपरा और सामाजिक दबाव ग्रामीण क्षेत्रों में बाल विवाह को मजबूरी बना रहे हैं। शिक्षा का स्तर सीधे इस समस्या से जुड़ा हुआ है। 10वीं तक पढ़ाई पूरी करने वाली महिलाओं का अनुपात केवल 33.7% है, वहीं पुरुषों में 10 साल या उससे अधिक पढ़ाई करने वालों का प्रतिशत 42% है। पढ़ाई बीच में छूटने के साथ ही कम उम्र में विवाह का दबाव बढ़ जाता है। स्कूल की घंटी बजने से पहले ही कई घरों में शहनाई गूंजने लगती है।
हालांकि, महिलाओं के मामले में सुधार नजर आता है। चार साल पहले 23.1% लड़कियों की शादी 18 साल से पहले हो रही थी, जो अब घटकर 20% रह गई है। इसका मतलब है कि प्रदेश महिलाओं के मामले में अब राष्ट्रीय औसत 20.1% से भी बेहतर स्थिति में है। बाल विवाह केवल सामाजिक मुद्दा नहीं, बल्कि कानूनन अपराध भी है। देश में लड़कियों के लिए न्यूनतम विवाह उम्र 18 और लड़कों के लिए 21 साल है। इसके उल्लंघन पर माता-पिता, रिश्तेदार और शादी कराने वालों को जेल या जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।
बाल विवाह रोकना केवल सरकार का काम नहीं, बल्कि समाज की जिम्मेदारी है। यदि कोई घटना सामने आती है तो चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या महिलाओं के लिए महिला हेल्पलाइन 181 पर तुरंत सूचना दें। बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना और उनके अधिकारों की रक्षा करना हम सभी की प्राथमिक जिम्मेदारी है।


