मप्र में राज्यसभा चुनाव की सरगर्मी है। इस बार राजनीति का रंग कुछ अलग दिख रहा है। तीन सीटों पर चुनाव होने वाले हैं-दो पर बीजेपी पहले से मजबूत, एक पर कांग्रेस का कब्जा। बीजेपी ने पहले ही तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल को दो सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं, लेकिन असली दिलचस्पी तीसरी सीट में है। बीजेपी अंदरखाने तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है। विधायकों के दस्तखत लेकर नामांकन फार्म तैयार किया जा रहा है, लेकिन आधिकारिक तौर पर पार्टी ने चुप्पी साध रखी है। इंदौर में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने साफ कहा कि यदि पार्टी तीसरा उम्मीदवार दे तो वे उसे जिताने में पूरी ताकत लगाएंगे। विजयवर्गीय की यह बात बीजेपी के रणनीतिक खेल की खुली चुप्पी को दर्शाती है-संख्या खेल और समीकरण बनाना दोनों पार्टी की ताकत हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री और उम्मीदवार तरुण चुग का यह कहना कि तीसरी सीट पर फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा, मैं तो फॉलोअर हूं। यह कथन बताता है कि अंदरखाने रणनीति पहले से बंध चुकी है और अब केवल समय का इंतजार है। तीसरी सीट के लिए संभावित नामों में पूर्व विधायक जीतू जिराती और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी चर्चा में हैं। यदि समीकरण सही बैठते हैं और बहुमत के आंकड़े पूरे होते हैं, तो बीजेपी की तरफ से यह सीट भी कांग्रेस के हाथ से छीनी जा सकती है। कांग्रेस के लिए भी खेल आसान नहीं है। मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी के कई दिग्गज नाराज हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और अन्य नेताओं ने सोशल मीडिया पर बधाई तक नहीं दी। इस नाराजगी का फायदा उठाना बीजेपी के लिए आसान होगा। राजनीति में अक्सर जीत केवल संख्या से तय नहीं होती, बल्कि सही रणनीति और समय पर चाल चलने से खेल बदल जाता है। मध्य प्रदेश की यह तीसरी राज्यसभा सीट भी उसी खेल का हिस्सा बन सकती है। बीजेपी की अंदरूनी रणनीति और कांग्रेस की छूटती हुई सहमति, इन सबका नतीजा जल्द ही सामने आएगा। तीसरी सीट का खेल सिर्फ प्रत्याशियों का नहीं, बल्कि दलों की सूझ-बूझ और नेताओं के समीकरणों का भी दांव है।


