नई दिल्ली। दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजन के साथ व्रत रखने की परंपरा है। कई लोग पूरे दिन निर्जला उपवास करते हैं, तो कुछ फलाहार के सहारे पूजा संपन्न होने तक भोजन नहीं करते। लेकिन कैंसर का इलाज करा रहे मरीजों, विशेषकर कीमोथेरेपी से गुजर रहे लोगों के लिए उपवास स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ा सकता है। चिकित्सकों के मुताबिक, इस दौरान शरीर को पर्याप्त पोषण और पानी की जरूरत होती है। ऐसे में भोजन और तरल पदार्थों का सेवन कम करना मरीज की परेशानी बढ़ा सकता है।
कीमोथेरेपी के दौरान बढ़ सकता है डिहाइड्रेशन का खतरा
कीमोथेरेपी का शरीर पर कई तरह से प्रभाव पड़ता है। इसके कारण मरीजों को जी मिचलाना, उल्टी, भूख में कमी, थकान और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में लंबे समय तक भूखे रहने या पानी नहीं पीने से शरीर में पोषक तत्वों और तरल पदार्थों की कमी हो सकती है। इसका असर मरीज की शारीरिक क्षमता और इलाज के दौरान होने वाली रिकवरी पर भी पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कैंसर मरीजों के लिए पर्याप्त कैलोरी, प्रोटीन, विटामिन और अन्य जरूरी पोषक तत्व लेना बेहद महत्वपूर्ण है। संतुलित खानपान से मांसपेशियों की ताकत बनाए रखने, रोग प्रतिरोधक क्षमता को सहारा देने और कीमोथेरेपी के दुष्प्रभावों से निपटने में मदद मिलती है।
हर मरीज के लिए अलग हो सकता है उपवास का फैसला
डॉक्टरों का कहना है कि कीमोथेरेपी के दौरान उपवास करना सुरक्षित होगा या नहीं, यह मरीज की बीमारी, इलाज के चरण, पोषण की स्थिति और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं पर निर्भर करता है। डायबिटीज, किडनी की बीमारी, लगातार वजन घटने, भूख नहीं लगने या डिहाइड्रेशन की समस्या से जूझ रहे मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
धार्मिक आस्था के कारण व्रत रखना चाहते हैं तो मरीज को पहले अपने कैंसर विशेषज्ञ (ऑन्कोलॉजिस्ट) और क्लिनिकल डाइटीशियन से सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टर की अनुमति के बिना निर्जला या लंबे समय का उपवास नहीं करना चाहिए। स्वास्थ्य की स्थिति अनुकूल होने पर सीमित खानपान के साथ पूजा-पाठ और त्योहार की परंपराएं निभाई जा सकती हैं।
कीमोथेरेपी के दौरान क्या खाएं?
विशेषज्ञों के मुताबिक, कीमोथेरेपी के दौरान ताजा, सादा, प्रोटीनयुक्त और आसानी से पचने वाला भोजन लेना बेहतर होता है। एक बार में अधिक भोजन करने के बजाय दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में कई बार खाना चाहिए।
मूंग दाल की खिचड़ी, दही-चावल, नरम इडली, पोंगल, ओट्स का दलिया, दाल-चावल, सब्जियों वाला दलिया, चावल की कांजी, उपमा, नरम पुलाव और सूप जैसे खाद्य पदार्थ अच्छे विकल्प हो सकते हैं। ये अपेक्षाकृत आसानी से पचते हैं और शरीर को जरूरी पोषण देने में मदद करते हैं।
इस दौरान अत्यधिक तैलीय, मसालेदार और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से बचना बेहतर है। भोजन का चयन मरीज की शारीरिक स्थिति, उपचार के दुष्प्रभावों और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार होना चाहिए।


