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    दागी उम्मीदवारों की बढ़ती संख्या लोकतंत्र के लिए गंभीर चेतावनी

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    Criminal Politics: लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास है और इस विश्वास की बुनियाद साफ-सुथरी राजनीति पर टिकी होती है। लेकिन चुनावी राजनीति में आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों की बढ़ती भागीदारी इस बुनियाद को लगातार कमजोर कर रही है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट में सामने आया है कि असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में राजनीतिक दलों ने आपराधिक मामले घोषित करने वाले 1,405 उम्मीदवारों को टिकट दिया। इससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि इनमें से 176 उम्मीदवारों को टिकट देने का कारण राजनीतिक दलों ने सार्वजनिक नहीं किया।

    सवाल केवल इतना नहीं है कि किस उम्मीदवार पर कितने मामले दर्ज हैं। असली सवाल यह है कि राजनीतिक दलों को ऐसे उम्मीदवारों में ऐसा क्या दिखाई देता है, जो उन्हें साफ छवि वाले दूसरे दावेदारों से बेहतर बनाता है? एडीआर के अनुसार कई मामलों में लोकप्रियता, सामाजिक कार्य, अनुभव, योग्यता और अच्छी छवि जैसे लगभग एक जैसे कारण बताए गए। यदि उम्मीदवार अलग-अलग हैं तो उनके चयन के कारण भी अलग और ठोस होने चाहिए। महज औपचारिकता निभाने के लिए एक जैसी भाषा का इस्तेमाल लोकतांत्रिक प्रक्रिया की गंभीरता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

    पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कभी राजनीति के अपराधीकरण की बदलती तस्वीर पर चिंता जताते हुए कहा था कि पहले अपराधी कानून से बचने के लिए नेताओं का सहारा लेते थे, फिर नेता चुनाव जीतने के लिए अपराधियों का सहारा लेने लगे और अंततः अपराधी स्वयं चुनाव लड़कर सदन तक पहुंचने लगे। आज उनकी यह चिंता और अधिक प्रासंगिक दिखाई देती है।

    निश्चित रूप से केवल आपराधिक मामला दर्ज होना किसी व्यक्ति को अपराधी सिद्ध नहीं करता। न्यायालय में दोष सिद्ध होने तक हर नागरिक निर्दोष माना जाता है। लेकिन राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी इससे कहीं बड़ी है। उन्हें यह बताना होगा कि गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे व्यक्ति को प्रत्याशी बनाने की मजबूरी क्या थी और उसके मुकाबले किसी स्वच्छ छवि वाले व्यक्ति को अवसर क्यों नहीं दिया गया?

    जनप्रतिनिधि केवल चुनाव जीतने वाला व्यक्ति नहीं होता, वह कानून बनाने और जनता के अधिकारों की रक्षा करने वाला प्रतिनिधि होता है। इसलिए राजनीति में अपराध के प्रवेश को सामान्य मान लेना लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। चुनाव जीतना लक्ष्य हो सकता है, लेकिन लोकतंत्र की गरिमा बचाना उससे बड़ा दायित्व है।

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