भोपाल। राजधानी भोपाल के 53 वर्षीय व्यवसायी विकास चौधरी के निधन के बाद उनके परिवार ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए उनके अंगदान का फैसला लिया। ब्रेन हेमरेज के इलाज के दौरान एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने विकास को ब्रेन डेड घोषित किया था। इसके बाद परिजनों की सहमति से उनका दिल, लिवर और दोनों किडनियां जरूरतमंद मरीजों को दान की गईं।
इस अंगदान से मध्यप्रदेश के साथ देश और विदेश के चार गंभीर मरीजों को नया जीवन मिला। विकास का दिल विशेष विमान से चेन्नई के एमजीएम अस्पताल भेजा गया, जहां उसका प्रत्यारोपण इराक के एक मरीज में किया गया।
इराकी मरीज के सीने में धड़का विकास का दिल
राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) की अंग आवंटन नीति के तहत पहले मुंबई में उपयुक्त मरीज की तलाश की गई। वहां उपयुक्त मरीज नहीं मिलने के बाद चेन्नई से संपर्क किया गया। चेन्नई की वेटिंग लिस्ट में पहले स्थान पर मौजूद इराक के एक नागरिक को विकास का दिल आवंटित किया गया।
इसके बाद चिकित्सकों की टीम ने इराकी मरीज में हृदय का सफल प्रत्यारोपण किया। इस तरह विकास के परिवार के फैसले ने देश की सीमाओं से परे एक मरीज को जीवन की नई उम्मीद दी।
ग्रीन कॉरिडोर से अंगों को पहुंचाया गया
अंगों को कम से कम समय में सुरक्षित रूप से संबंधित अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए भोपाल पुलिस और प्रशासन के सहयोग से ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। विकास का दिल एम्स भोपाल से राजा भोज एयरपोर्ट तक ग्रीन कॉरिडोर के जरिए पहुंचाया गया और वहां से विशेष विमान से चेन्नई भेजा गया।
वहीं, लिवर को भोपाल से इंदौर स्थित सीएचएल अस्पताल तक ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से पहुंचाया गया। दोनों किडनियां भोपाल के बंसल अस्पताल में भर्ती जरूरतमंद मरीजों में प्रत्यारोपित की गईं।
परिवार के फैसले ने दी चार जिंदगियों को नई उम्मीद
विकास चौधरी के परिवार का अंगदान का फैसला इस बात की मिसाल है कि किसी व्यक्ति के निधन के बाद भी उसके अंग दूसरे लोगों के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अंगदान के इस मानवीय निर्णय से चार मरीजों को नया जीवन मिला और एक भारतीय परिवार की संवेदनशील पहल अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंची।


