नई दिल्ली। BRICS Summit 2026:18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए राजधानी दिल्ली पूरी तरह तैयार है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को नई दिल्ली पहुंच गए। एयरपोर्ट पर केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने उनका स्वागत किया। पुतिन के भारत दौरे का सबसे अहम पहलू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली द्विपक्षीय वार्ता है। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं की बातचीत में रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी।
पुतिन के अलावा ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले कई देशों के प्रतिनिधि भी दिल्ली पहुंचने लगे हैं। ब्राजील की ओर से विदेश मंत्री माउरो विएरा प्रतिनिधिमंडल के साथ नई दिल्ली पहुंचे हैं। वहीं फिलीपींस की विदेश सचिव मारिया थेरेसा पी. लाजारो भी राजधानी पहुंच चुकी हैं।
ट्रैफिक से राहत के लिए एक बस में पहुंचेंगे मंत्री और मुख्यमंत्री
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान दिल्ली में वीआईपी मूवमेंट से आम जनता को होने वाली परेशानी कम करने के लिए सरकार ने अलग पहल की है। सूत्रों के मुताबिक, सम्मेलन में शामिल होने वाले केंद्रीय मंत्री और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री अलग-अलग वाहनों के काफिले के बजाय एक ही बस से भारत मंडपम पहुंचेंगे।
इसके लिए सभी नेता पहले संसद भवन परिसर में एकत्र होंगे और वहां से एक साथ बस के जरिए भारत मंडपम के लिए रवाना होंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य वीआईपी काफिलों की संख्या कम करना, यातायात व्यवस्था को सुचारू रखना और आम लोगों को कम से कम असुविधा होने देना है।
रंग-बिरंगी रोशनी और पोस्टरों से सजी दिल्ली
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर राजधानी दिल्ली को भव्य रूप से सजाया गया है। साउथ एवेन्यू, तीन मूर्ति मार्ग समेत प्रमुख इलाकों में रंग-बिरंगे पोस्टर, बैनर और विशेष रोशनी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
12 और 13 सितंबर को प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में होने वाले इस सम्मेलन में सदस्य और साझेदार देशों के शीर्ष नेता आर्थिक सहयोग, व्यापार, वैश्विक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय रणनीति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इस बार 11 सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों की भागीदारी सम्मेलन को और महत्वपूर्ण बना रही है।
पहली बार आमने-सामने होंगे ईरान और यूएई के शीर्ष नेता
ब्रिक्स सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कई राष्ट्राध्यक्ष हिस्सा ले रहे हैं। इनमें दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम शामिल हैं।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की पृष्ठभूमि में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और अबूधाबी के क्राउन प्रिंस जायद अल नाहयान की संभावित आमने-सामने मौजूदगी पर भी पूरी दुनिया की नजर रहेगी। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के भी सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद है।
भारत-रूस वार्ता में रक्षा सहयोग पर रहेगी नजर
ब्रिक्स सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच होने वाली द्विपक्षीय बातचीत पर भी विशेष नजर रहेगी। दोनों देशों के बीच रक्षा और ऊर्जा सहयोग के साथ ब्रह्मोस, सुखोई और एस-400 जैसे प्रमुख रक्षा कार्यक्रमों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की संभावना है।
भारत और रूस लंबे समय से रणनीतिक साझेदार रहे हैं। ऐसे में पुतिन की यात्रा को दोनों देशों के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैश्विक स्तर पर बदलते सामरिक समीकरणों, यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी देशों के साथ रूस के तनाव के बीच मोदी-पुतिन वार्ता का कूटनीतिक महत्व और बढ़ गया है।
विदेश मंत्रालय ने कहा- सफल सम्मेलन के लिए पूरा सरकारी तंत्र सक्रिय
विदेश मंत्रालय ने ब्रिक्स सम्मेलन की तैयारियों को व्यापक टीम वर्क का परिणाम बताया है। मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, भारत पिछले एक वर्ष से ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। इस दौरान विभिन्न मंत्रालयों के नेतृत्व में कई संयुक्त कार्य समूहों की बैठकें देश के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित की गईं।
अब 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में शिखर सम्मेलन का मुख्य आयोजन होगा। सुरक्षा व्यवस्था से लेकर विदेशी मेहमानों के आवागमन तक के लिए विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस समेत विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच लगातार समन्वय किया जा रहा है।
ब्रिक्स सम्मेलन के जरिए भारत न केवल वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों पर अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, बल्कि बदलती विश्व व्यवस्था में अपनी स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति का संदेश भी मजबूती से देने की तैयारी में है।
रूस-भारत संबंधों पर बोले सलमान खुर्शीद
ब्रिक्स सम्मेलन के बीच रूस-भारत संबंधों और वैश्विक संघर्षों को लेकर पूर्व विदेश मंत्री एवं कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि रूस भारत का समय की कसौटी पर खरा उतरा मित्र देश रहा है और दोनों देशों के संबंधों को केवल सस्ते ईंधन की उपलब्धता तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए।
खुर्शीद ने कहा कि भारत अब जरूरत के समय रूस को पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति कर रहा है और यूरोपीय साझेदार भी भारत-रूस संबंधों की वास्तविकता को अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्षों को समाप्त कराने में भारत की भूमिका को और सक्रिय किए जाने की जरूरत बताई।
उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिक्स जैसा सम्मेलन केवल सरकार का कार्यक्रम नहीं बल्कि राष्ट्रीय महत्व का आयोजन है। ऐसे में विपक्ष, जो देश की जनता का प्रतिनिधित्व करता है, उसे भी सम्मेलन की तैयारियों अथवा अनौपचारिक बैठकों में शामिल किया जाता तो यह बेहतर होता।


