भोपाल रेलवे स्टेशन के लग्जरी एग्जीक्यूटिव लाउंज में चूहों की मौजूदगी का मामला केवल साफ-सफाई की कमी का सवाल नहीं है, बल्कि रेलवे की पूरी व्यवस्था और यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। जिस लाउंज को यात्रियों के आराम, सुविधा और बेहतर सेवा के नाम पर संचालित किया जा रहा है, वहां यदि भोजन और चाय-कॉफी के काउंटर के आसपास चूहे खुलेआम घूमते दिखाई दें तो इसे सामान्य लापरवाही कहकर कैसे टाला जा सकता है?
रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थान पर खान-पान की व्यवस्था में स्वच्छता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। खासकर उस लाउंज में, जहां यात्री सुविधा के लिए शुल्क चुका रहे हैं, वहां साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा के मानकों का पालन होना जरूरी है। सवाल यह है कि लाउंज में नियमित निरीक्षण कौन करता है? कीट नियंत्रण की व्यवस्था कितनी प्रभावी है? खाद्य सामग्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? और सबसे बड़ा सवाल-यदि जिम्मेदार अधिकारी नियमित निगरानी कर रहे हैं तो चूहे वहां तक पहुंच कैसे रहे हैं?
रेलवे प्रशासन अक्सर यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं देने और स्टेशन को विश्वस्तरीय बनाने की बात करता है। लेकिन किसी सुविधा की चमक-दमक तभी मायने रखती है, जब उसके पीछे व्यवस्था भी उतनी ही मजबूत हो। एसी, सोफा, आधुनिक सजावट और प्रीमियम सेवाओं के बीच यदि चूहे भोजन के आसपास मंडराते मिलें तो यह पूरी व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है।
यह मामला केवल एक लाउंज तक सीमित नहीं रहना चाहिए। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जांच करानी चाहिए कि सफाई, फ्यूमिगेशन और पेस्ट कंट्रोल की व्यवस्था कागजों पर है या वास्तव में जमीन पर भी दिखाई देती है। जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होनी चाहिए और यात्रियों की सेहत के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।
आखिर रेलवे के जिम्मेदार अधिकारी क्या देख रहे हैं-यात्रियों की सुविधा या चूहों का राज?


