वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। अमेरिकी सेना ने ईरान के पांच तेल टैंकरों को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया है। यह कार्रवाई अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों पर ईरान की ओर से किए गए मिसाइल हमलों के बाद की गई। एसोसिएटेड प्रेस ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से इसकी जानकारी दी है।
ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक, तेहरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी ठिकानों की ओर मिसाइलें दागीं। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच जवाबी सैन्य कार्रवाई का सिलसिला और तेज हो गया है।
अमेरिका ने पांच तेल टैंकरों को बनाया निशाना
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ओमान की खाड़ी में किविक, चारमिनार, होराइजन-1 और रिस्को नाम के चार तेल टैंकरों को नष्ट किया गया। पांचवें जहाज डेर्या को होर्मुज जलडमरूमध्य में खार्ग द्वीप के पास निशाना बनाया गया।
अमेरिकी सेना का कहना है कि कार्रवाई से पहले पांचों जहाजों के चालक दल को जहाज खाली करने की चेतावनी दी गई थी। ईरान के सरकारी टेलीविजन ने भी दावा किया कि सभी चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
ईरान के विमानन क्षेत्र की 36 संस्थाओं पर प्रतिबंध
तेल टैंकरों पर सैन्य कार्रवाई के साथ अमेरिका ने ईरान के विमानन क्षेत्र पर भी आर्थिक दबाव बढ़ाया है। ट्रंप प्रशासन ने ईरान से जुड़ी 36 संस्थाओं पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें यात्री और निजी एयरलाइंस के अलावा विदेशी कार्गो और लॉजिस्टिक्स सेवाएं देने वाली कंपनियां भी शामिल हैं।
अमेरिका का कहना है कि ईरान का विमानन नेटवर्क हथियारों, लोगों और प्रतिबंधित सामान की आवाजाही के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरान को उसके कारोबारी और वित्तीय सहयोगियों से अलग करना है।
कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों को भी चेतावनी
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने चेतावनी दी है कि ईरान की प्रतिबंधित एयरलाइनों और संस्थाओं के साथ कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों को भी वैश्विक वित्तीय व्यवस्था से बाहर किया जा सकता है। ऐसी संस्थाओं से जुड़ी अमेरिका में मौजूद संपत्तियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
यह कदम ट्रंप प्रशासन के ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसका लक्ष्य ईरान सरकार की आय और आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख स्रोतों पर दबाव बढ़ाना है।
माही एयर पर भी अमेरिका की कार्रवाई
नई कार्रवाई में ईरान की माही एयर से जुड़े नेटवर्क को भी निशाना बनाया गया है। अमेरिका के अनुसार, तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात, कजाखस्तान और मलेशिया की कुछ निजी कंपनियों ने माही एयर को सामान और लॉजिस्टिक्स सेवाएं उपलब्ध कराई थीं।
अमेरिका पहले भी माही एयर पर कार्रवाई कर चुका है। 2019 में ट्रंप प्रशासन ने उस पर आतंकवाद से जुड़े प्रतिबंध लगाए थे। इससे पहले 2011 में ओबामा प्रशासन ने भी एयरलाइन को निशाना बनाया था। अमेरिका का आरोप रहा है कि माही एयर का इस्तेमाल ईरान समर्थित संगठनों तक हथियार और अन्य सामान पहुंचाने में किया गया।
ईरान ने अमेरिका पर लगाया प्रतिबंधों की विफलता का आरोप
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी प्रतिबंध नीति की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाई से अमेरिका को भी नुकसान हुआ है और उसकी वैश्विक छवि प्रभावित हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रतिबंधों और सैन्य कार्रवाई से लक्ष्य हासिल नहीं होने के बाद अमेरिका फिर से प्रतिबंधों का सहारा क्यों ले रहा है।
अमेरिका के ड्रोन को पकड़ने का ईरान का दावा
इस बीच ईरान ने दावा किया है कि उसकी नौसेना ने अमेरिका का एक अंडरवॉटर ड्रोन पकड़ लिया है। ईरानी सरकारी टेलीविजन के अनुसार, यह ड्रोन होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रवेश क्षेत्र के पास मंगलवार को पकड़ा गया।
हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि एंडुरिल डाइव-एलडी ड्रोन एक दिन से अधिक समय पहले ही खराब हो गया था। अमेरिकी प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स के मुताबिक, ड्रोन समुद्री क्षेत्र का सर्वे कर रहा था और अब अमेरिकी सेना के पास नहीं है।
अमेरिका ने ड्रोन को पुराना और खराब मॉडल बताते हुए कहा कि इसमें कोई संवेदनशील जानकारी, गोपनीय सोनार या रडार तकनीक नहीं थी। अमेरिकी पक्ष के अनुसार, इसमें सामान्य और बाजार में आसानी से उपलब्ध तकनीक का इस्तेमाल किया गया था।
अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने की आशंका
तेल टैंकरों पर सैन्य कार्रवाई, ईरान के मिसाइल हमले, नए आर्थिक प्रतिबंध और ड्रोन विवाद के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका है। ऐसे में आने वाले दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य, ईरान के तेल निर्यात और क्षेत्रीय अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर होने वाली गतिविधियां बेहद महत्वपूर्ण रहेंगी।


