भोपाल। पुलिस लाइन में अटैच होकर बैठने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को अब लंबित मामलों की विवेचना की जिम्मेदारी सौंपी गई है। भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने प्रधान आरक्षक से लेकर निरीक्षक स्तर तक के 44 पुलिसकर्मियों को लंबित प्रकरणों की केस डायरी सौंपकर जांच पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
नई व्यवस्था के तहत इन पुलिसकर्मियों को मुख्य रूप से धोखाधड़ी से जुड़े लंबित मामलों की विवेचना सौंपी गई है। संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा में जांच पूरी कर न्यायालय में चालान पेश करना होगा।
पुलिस लाइन में तैनाती अब नहीं होगी निष्क्रिय
पुलिस विभाग ने पुलिस लाइन में पदस्थ अनुभवी अधिकारियों और कर्मचारियों की क्षमता का इस्तेमाल लंबित मामलों के निपटारे में करने का फैसला किया है। इनमें ऐसे पुलिसकर्मी भी शामिल हैं, जिन्हें थानों में विवेचना और कानून-व्यवस्था संभालने का अनुभव रहा है।
अब पुलिस लाइन में तैनाती का मतलब केवल प्रशासनिक या अन्य ड्यूटी तक सीमित रहना नहीं होगा। लंबित मामलों की जांच में प्रदर्शन भी उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा माना जाएगा।
केस डायरी की होगी नियमित मॉनिटरिंग
केस डायरी सौंपे जाने के बाद प्रत्येक प्रकरण की जांच की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी। वरिष्ठ अधिकारी विवेचना की गुणवत्ता, निर्धारित समय सीमा और न्यायालय में चालान पेश किए जाने की स्थिति पर नजर रखेंगे।
जांच में अनावश्यक देरी या लापरवाही मिलने पर संबंधित पुलिसकर्मी की जवाबदेही तय की जाएगी।
थानों के जांच अधिकारियों का भी घटेगा बोझ
पुलिस विभाग का लक्ष्य लंबित प्रकरणों की संख्या कम करना और उपलब्ध पुलिस बल का बेहतर उपयोग करना है। पुलिस लाइन में पदस्थ अनुभवी पुलिसकर्मियों को विवेचना से जोड़ने से थानों के जांच अधिकारियों पर लंबित मामलों का दबाव कम होने की उम्मीद है।
विभाग के मुताबिक, बेहतर और गुणवत्तापूर्ण विवेचना करने वाले पुलिसकर्मियों के प्रदर्शन को उनकी भविष्य की फील्ड पोस्टिंग में भी ध्यान में रखा जाएगा। यानी पुलिस लाइन में तैनाती के दौरान किया गया काम भी अब उनकी कार्यक्षमता और प्रदर्शन का महत्वपूर्ण आधार बनेगा।


