भोपाल/बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में 30 बैगा आदिवासी बच्चों की मौत और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर उठ रहे सवालों के बीच राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने जबलपुर जिला चिकित्सालय में पदस्थ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. शत्रुघ्न सिंह दाहिया को बालाघाट का नया मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) नियुक्त किया है।
बालाघाट में पिछले कुछ समय से सीएमएचओ स्तर पर लगातार बदलाव देखने को मिल रहे हैं। दो सितंबर को डिंडौरी के सीएमएचओ डॉ. मनोज पांडेय को डॉ. परेश उपलव को हटाकर बालाघाट का प्रभार सौंपा गया था। अब सरकार ने डॉ. दाहिया को जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी दी है।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर होगी नजर
नए सीएमएचओ के सामने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना बड़ी चुनौती होगी। उन्हें जिला अस्पताल के साथ-साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) की व्यवस्थाओं की निगरानी करनी होगी।
खासकर ग्रामीण और दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में मरीजों को समय पर उपचार मिले, अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता बनी रहे और जरूरी दवाओं एवं चिकित्सा सुविधाओं की कमी न हो, यह सुनिश्चित करना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल होगा।
इसके अलावा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम, टीकाकरण, पोषण अभियान और केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी भी उनके जिम्मे रहेगी।
शिशु रोग विशेषज्ञ का अनुभव बनेगा अहम
डॉ. शत्रुघ्न सिंह दाहिया इससे पहले जबलपुर जिला चिकित्सालय में शिशु रोग विशेषज्ञ के तौर पर सेवाएं दे रहे थे। अब उन्हें प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपते हुए बालाघाट भेजा गया है।
जिले में हाल में बच्चों की मौत से जुड़े घटनाक्रम और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर उठे सवालों के बीच डॉ. दाहिया का बाल स्वास्थ्य क्षेत्र में विशेषज्ञ अनुभव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि उनकी प्राथमिकता बच्चों और माताओं से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के साथ-साथ जिले की समूची चिकित्सा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाना होगी।


