काठमांडू। नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। बाढ़ से अब तक 32,933 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि मृतकों की संख्या बढ़कर 1,344 हो गई है। प्रभावित क्षेत्रों से लगातार शव मिलने के बाद मृतकों का आंकड़ा बढ़ा है। इस आपदा में सड़क, पुल, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्रों समेत बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है।
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने आपदा से हुए नुकसान की शुरुआती रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं और कई इलाकों में सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
नेपाल में इतनी बड़ी तबाही कैसे हुई?
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों का एक बड़ा हिस्सा अचानक नीचे गिर गया। इसके बाद इलाके में अचानक बाढ़ की स्थिति बन गई। तेज बहाव ने नेपाल के उत्तरी और मध्य हिस्सों के कई शहरों और गांवों को अपनी चपेट में ले लिया।
बाढ़ के कारण कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ है। शुरुआती सरकारी आकलन के मुताबिक, 32,933 लोग प्रभावित हुए हैं। वहीं, शिक्षण संस्थानों को हुए नुकसान के कारण 6,500 से अधिक छात्र प्रभावित हुए हैं।
चार स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह तबाह
बाढ़ ने स्वास्थ्य सुविधाओं को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। प्रभावित क्षेत्रों में चार स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जबकि तीन अन्य स्वास्थ्य केंद्रों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इससे बाढ़ प्रभावित लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में भी मुश्किलें बढ़ गई हैं।
55 किलोमीटर सड़कें और 37 पुल क्षतिग्रस्त
बाढ़ से परिवहन व्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुंचा है। करीब 55 किलोमीटर सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इसके अलावा वाहनों की आवाजाही वाले 37 पुल पूरी तरह तबाह हो गए हैं। वहीं, 68 झूला पुलों को भी नुकसान पहुंचा है।
प्राधिकरण के मुताबिक, नुकसान का विस्तृत आकलन अभी जारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में नुकसान का आंकड़ा और बढ़ सकता है।
सरकार पर राहत और बचाव में तालमेल की कमी का आरोप
बाढ़ के बाद सरकार के राहत और बचाव अभियान को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अर्जुन नरसिंह केसी ने सरकार पर राहत और बचाव कार्यों के बीच पर्याप्त समन्वय नहीं होने का आरोप लगाया है।
केसी ने कहा कि आपदा के दौरान बचाव और राहत अभियान में गंभीर तालमेल की कमी दिखाई दी। उन्होंने आपदा से निपटने के लिए दीर्घकालिक योजना में भी खामियां होने की बात कही।
हालांकि, उन्होंने नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के बचाव एवं खोज अभियान में योगदान की सराहना की। उनके मुताबिक, इन सुरक्षा बलों ने प्रभावित इलाकों में लोगों की मदद और राहत पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
800 अरब रुपये से ज्यादा नुकसान का दावा
केसी ने दावा किया कि इस प्राकृतिक आपदा से नेपाल को 800 अरब रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने आपदा के बाद प्रभावित क्षेत्रों की जरूरतों का आकलन करने के लिए पर्याप्त तेजी से कदम नहीं उठाए।
उनका कहना है कि बड़े पैमाने पर हुए नुकसान को देखते हुए तत्काल राहत के साथ-साथ पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए भी ठोस योजना की जरूरत है।
नेपाल ने क्यों उठाया जलवायु न्याय का मुद्दा?
केसी ने सरकार से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जलवायु न्याय का मुद्दा मजबूती से उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि नेपाल जैसे विकासशील देश जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। ऐसे देशों को जलवायु आपदाओं से होने वाले नुकसान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुआवजा और सहायता मिलनी चाहिए।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की पूर्व चेतावनियों का भी जिक्र किया। केसी के मुताबिक, नेपाल में हुई यह तबाही एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि जलवायु परिवर्तन का सबसे ज्यादा असर उन देशों पर पड़ रहा है, जिनका इसमें योगदान अपेक्षाकृत कम रहा है।
बाढ़ ने नेपाल के सामने तत्काल राहत, पुनर्वास और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। आने वाले दिनों में नुकसान के विस्तृत आकलन से तबाही की वास्तविक तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।


