भोपाल। बालाघाट जिले में बच्चों की मौत के मामले और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों के बीच मध्य प्रदेश सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. परेश उपलव को हटाने का फैसला किया गया है। उनकी जगह डिंडौरी के CMHO डॉ. मनोज पांडेय को बालाघाट की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
बालाघाट के बैहर और बिरसा क्षेत्र में बच्चों की मौत के मामले सामने आने के बाद जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था सवालों के घेरे में है। अब तक 29 बच्चों की मौत की जानकारी सामने आई है, हालांकि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज आंकड़ा इससे कम बताया जा रहा है। बच्चों की बीमारी और मौत के पीछे मलेरिया, खसरा और कुपोषण जैसी वजहों का उल्लेख किया गया है।
मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की टीमें प्रभावित गांवों में पहुंचीं। इससे पहले जिला मलेरिया अधिकारी और जिला टीकाकरण अधिकारी को भी जिम्मेदारियों से हटाया जा चुका है। अब CMHO को बदले जाने के बाद सरकार ने स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही को लेकर सख्ती का संकेत दिया है।
इस मामले में मई की घटनाएं भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। मई में ही दो बच्चों की मौत हुई थी। इसके बाद जून और जुलाई में बच्चों के बीमार पड़ने तथा मौत के मामले सामने आते रहे। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि शुरुआती घटनाओं के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बीमारी के कारणों की पहचान, जांच और रोकथाम के लिए समय रहते व्यापक कदम क्यों नहीं उठाए।
बच्चों के टीकाकरण को लेकर भी स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। जानकारी के मुताबिक, बालाघाट जिले में पिछले दो-तीन वर्षों के दौरान बच्चों का टीकाकरण करीब 60 से 70 प्रतिशत के बीच रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में टीकाकरण तथा स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है।
इससे पहले बच्चों की मौत और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर प्रकाशित खबरों में भी CMHO की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए थे। जिला टीकाकरण अधिकारी के पद से हटाए जाने के बावजूद डॉ. परेश उपलव के CMHO पद पर बने रहने को लेकर भी सवाल उठे थे। अब सरकार द्वारा नए CMHO की नियुक्ति को बालाघाट की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


