नई दिल्ली। भारत में आगामी जनगणना को डिजिटल तकनीक से जोड़ने की तैयारी है। पहली बार जातिगत आंकड़ों के संकलन और उनके विश्लेषण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और आधुनिक डेटा एनालिटिक्स टूल्स का इस्तेमाल किए जाने की योजना है। इससे करोड़ों लोगों से जुटाए जाने वाले आंकड़ों को व्यवस्थित करने और उनका विश्लेषण करने में मदद मिल सकती है।
जातिगत गणना अपने आप में बेहद जटिल प्रक्रिया मानी जाती है। देश के अलग-अलग हिस्सों में एक ही जाति या उपजाति के नाम अलग-अलग वर्तनी, उच्चारण या स्थानीय नामों से दर्ज हो सकते हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में सामने आने वाली अलग-अलग प्रविष्टियों को एक समान श्रेणी में रखना चुनौतीपूर्ण होगा। AI आधारित सिस्टम ऐसे समान नामों और प्रविष्टियों की पहचान कर उन्हें संबंधित श्रेणियों में वर्गीकृत करने में मदद कर सकते हैं।
मशीन लर्निंग एल्गोरिदम समान उच्चारण, शब्दों और पैटर्न वाली प्रविष्टियों का विश्लेषण कर संभावित रूप से उन्हें क्लस्टर कर सकेंगे। इसके साथ ही नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) तकनीक का इस्तेमाल अलग-अलग भाषाओं और बोलियों में दर्ज सूचनाओं को समझने तथा व्यवस्थित करने में किया जा सकता है।
जनगणना के दौरान बड़ी मात्रा में डिजिटल डेटा तैयार होगा। इस डेटा को व्यवस्थित करने, गलत या अस्पष्ट प्रविष्टियों की पहचान करने और रिकॉर्ड को प्रोसेस करने में इंटेलिजेंट कैरेक्टर रिकग्निशन जैसी तकनीकों की भी भूमिका हो सकती है।
AI के इस्तेमाल का एक बड़ा फायदा आंकड़ों के तेजी से विश्लेषण के रूप में देखा जा रहा है। पारंपरिक तरीके से विशाल डेटा को छांटने और वर्गीकृत करने में लंबा समय लग सकता है, जबकि आधुनिक तकनीकों से इस प्रक्रिया को काफी तेज किया जा सकता है। इससे जनगणना के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट अपेक्षाकृत कम समय में तैयार होने की उम्मीद है।
जातिगत आंकड़ों का महत्व सामाजिक योजनाओं, कल्याणकारी नीतियों और संसाधनों के बेहतर वितरण के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, AI के इस्तेमाल के साथ डेटा की सटीकता, गोपनीयता और गलत वर्गीकरण को रोकना भी बड़ी चुनौती होगी। इसलिए अंतिम आंकड़ों को जारी करने से पहले मानवीय सत्यापन और विशेषज्ञों की निगरानी महत्वपूर्ण रहेगी।


