India GDP Growth: देश की आर्थिक विकास दर 7.8 प्रतिशत रहना निश्चित रूप से उत्साहजनक उपलब्धि है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, युद्ध और व्यापारिक चुनौतियों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था का इस गति से आगे बढ़ना देश की उत्पादन क्षमता, उपभोग और करोड़ों नागरिकों की मेहनत को दर्शाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को बधाई देते हुए इसी सामूहिक शक्ति को रेखांकित किया है। लेकिन विकास दर के इन आंकड़ों के साथ कुछ ऐसे सवाल भी हैं, जिन पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री ने गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने और विदेश यात्राओं तथा विदेश में होने वाली शादियों पर खर्च कम करने की अपील की है। पहली नजर में यह व्यक्तिगत खर्च से जुड़ी सलाह लग सकती है, लेकिन इसके पीछे देश के विदेशी मुद्रा भंडार और चालू खाते पर पड़ने वाले दबाव की बड़ी आर्थिक चिंता है।
भारत अपनी जरूरत का करीब 99 प्रतिशत सोना विदेशों से आयात करता है। वर्ष 2025-26 में सोने के आयात पर करीब 6.4 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए। विदेशों से आयात होने वाली वस्तुओं के कुल खर्च में सोने की करीब 9 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ऐसे में सोने की गैर-जरूरी खरीदारी कम करना केवल बचत का मामला नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा की बचत से भी जुड़ा विषय है।
हालांकि सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि सोने की मांग को नियंत्रित करने के प्रयासों से अर्थव्यवस्था के वैध आभूषण कारोबार और रोजगार पर प्रतिकूल असर न पड़े। भारतीय समाज में सोना केवल निवेश नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं का भी हिस्सा है। इसलिए समाधान प्रतिबंध नहीं, बल्कि संतुलित आर्थिक व्यवहार और बेहतर निवेश विकल्प उपलब्ध कराने में है।
प्रधानमंत्री का ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भरता पर जोर इसी व्यापक सोच का हिस्सा होना चाहिए। देश में जितना अधिक उत्पादन बढ़ेगा, आयात पर निर्भरता उतनी ही घटेगी। 7.8 प्रतिशत की विकास दर को टिकाऊ बनाने के लिए केवल तेज वृद्धि पर्याप्त नहीं है; विदेशी मुद्रा बचत, घरेलू उत्पादन, रोजगार और निवेश को भी समान महत्व देना होगा।
विकसित भारत का लक्ष्य तभी सार्थक होगा, जब विकास के आंकड़ों के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता भी मजबूत हो। आज जरूरत केवल अधिक खर्च करने की नहीं, बल्कि समझदारी से खर्च करने और देश की आर्थिक शक्ति को मजबूत करने की है।


