काठमांडू। नेपाल-तिब्बत सीमा पर बुधवार सुबह आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। नेपाल में 162 और तिब्बत में 3 लोगों की मौत हुई है। 1000 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ के तेज बहाव में घर, वाहन और सरकारी ढांचे बह गए। 19 पुल, करीब 40 किलोमीटर सड़क और 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी तबाह हुए हैं।
शुरुआत में बाढ़ से पहले आए तेज झटकों को भूकंप माना गया था, लेकिन अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार चीन की ओर ल्हेंदे नदी में पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा खिसककर गिरा था। इस लैंडस्लाइड से इतना शक्तिशाली झटका पैदा हुआ, जो 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा महसूस हुआ। इसके बाद पानी और मलबे का सैलाब भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में पहुंचा और विनाशकारी बाढ़ आ गई।
बाढ़ का असर करीब 150 किलोमीटर दूर चितवन तक पहुंचा, जहां अब तक 33 शव बरामद किए गए हैं। खराब मौसम, टूटे रास्तों और भारी मलबे के कारण राहत एवं बचाव अभियान में लगातार मुश्किलें आ रही हैं।
133 भारतीय लापता, कैलाश मानसरोवर यात्री भी प्रभावित
नेपाल में लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक कम से कम 133 भारतीय नागरिक लापता हैं। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालु भी शामिल हैं। तमिलनाडु के 37 पर्यटकों और कोलकाता से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 32 लोगों के एक समूह का भी पता नहीं चल पाया है।
ईशा फाउंडेशन ने भी बताया है कि नेपाल के इमिग्रेशन सेंटर में मौजूद 77 लोगों से संपर्क टूट गया है। समूह के लीडर से सुबह 9:05 बजे आखिरी बार बात हुई थी। इसके करीब 10 मिनट बाद दोबारा संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो सकी।
बिहार और यूपी में भी बाढ़ का अलर्ट
नेपाल से आने वाले पानी के कारण भारत में बिहार की गंडक नदी और उससे जुड़ी नदियों में जलस्तर बढ़ने की आशंका है। करीब 3 मीटर ऊंची फ्लड वेव आने का अलर्ट है। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। सीतामढ़ी और शिवहर पर भी नजर रखी जा रही है।
गंडक नदी में पानी बढ़ने के बाद बगहा स्थित गंडक बैराज के 36 गेट खोल दिए गए हैं। नेपाल की ओर से करीब डेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की जानकारी है। पानी के साथ मलबा, भैंस, फ्रिज और घर का सामान भी बहकर आने की खबर है।
25 देशों के नागरिक लापता
नेपाल में लापता लोगों में 341 विदेशी नागरिक शामिल हैं। कम से कम 25 देशों के नागरिकों के लापता होने की पुष्टि हुई है। सूची में भारत के 133, अमेरिका के 47, इटली के 90, यूक्रेन के 53, ऑस्ट्रेलिया के 34, दक्षिण कोरिया के 9, रूस के 4, पुर्तगाल के 2 और बेल्जियम के 3 नागरिक शामिल हैं।
13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और 42 किमी सड़क तबाह
बाढ़ से रसुवा और आसपास के क्षेत्रों में 13 जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। इनमें 8 चालू और 5 निर्माणाधीन परियोजनाएं शामिल हैं। इनकी कुल क्षमता करीब 748 मेगावाट बताई गई है। बेट्रावती से रसुवागढ़ी सीमा चौकी तक करीब 42 किलोमीटर सड़क क्षतिग्रस्त या बह गई है। कम से कम 32 बड़े पुल भी ध्वस्त हुए हैं।
रातभर चला रेस्क्यू ऑपरेशन
बाढ़ के बाद नेपाल में राहत और बचाव अभियान रातभर जारी रहा। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक 11 टीमें सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी रहीं। सुबह बड़ी संख्या में लोगों को हेलीकॉप्टर से सुरक्षित निकालने की तैयारी की गई। सुरंगों में फंसे लोगों को बाहर निकालने का अभियान भी चलाया जा रहा है।
नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। नेपाल के फ्लड फोरकास्टिंग डिविजन ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने और नदी के आसपास नहीं जाने की सलाह दी है।
भारत ने भेजी 10 टन राहत सामग्री
नेपाल में जारी राहत अभियान के बीच भारत ने 10 टन मानवीय सहायता और जरूरी दवाइयां भेजी हैं। भारतीय वायुसेना का सी-130जे विमान राहत सामग्री लेकर काठमांडू पहुंचा। इसमें अस्थायी टेंट, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाइयां शामिल हैं।


