नई दिल्ली। भाजपा की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन के बाद अब केंद्र सरकार में भी बड़े बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी महीने अपनी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल कर सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, दो दर्जन से अधिक मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं। कुछ मंत्रियों का कामकाज कम किया जा सकता है, जबकि कुछ नेताओं को नई और बड़ी जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। सरकार के कुछ चेहरों की संगठन में वापसी की संभावना भी जताई जा रही है।
संगठन में बदलाव के बाद सरकार में जिम्मेदारियों का नए सिरे से बंटवारा 2027 के विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। संभावित फेरबदल से सरकार की आने वाले समय की प्राथमिकताओं के संकेत भी मिल सकते हैं।
पीयूष गोयल का मंत्रालय बदलने की संभावना कम
भाजपा ने पीयूष गोयल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी है। इसके बावजूद उनके केंद्रीय मंत्री बने रहने की संभावना है। वाणिज्य मंत्री के तौर पर अमेरिका सहित विभिन्न देशों के साथ व्यापार समझौतों में उनकी भूमिका अहम है। अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में चल रहे उतार-चढ़ाव के बीच सरकार फिलहाल उनका मंत्रालय बदलने के पक्ष में नहीं दिख रही है।
धर्मेंद्र प्रधान की फिर हो सकती है सरकार में वापसी
नीट विवाद के बाद शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले धर्मेंद्र प्रधान को किसी दूसरे मंत्रालय की जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है। संसद भवन में उन्हें केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के पास कमरा आवंटित किया गया है। इसे भी उनकी संभावित नई जिम्मेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है।
हरदीप पुरी के भविष्य पर टिकी नजर
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी का राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजे जाने को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। अगर उनका दोबारा नामांकन नहीं होता है तो उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में सिख समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं रह जाएगा।
वहीं, मोदी कैबिनेट में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के संकेत भी मिल रहे हैं। राजस्थान से डॉ. अलका गुर्जर का नाम संभावित मंत्रियों की सूची में चर्चा में है। दक्षिण भारत को भाजपा के नए संगठनात्मक ढांचे में अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व मिलने के बाद सरकार में इसकी भरपाई किए जाने की संभावना है। फिलहाल दक्षिण भारत से करीब 10 मंत्री हैं, जिनमें तीन कैबिनेट और सात राज्य मंत्री शामिल हैं।
सहयोगी दलों की मांग भी फेरबदल में अहम
मोदी कैबिनेट में बदलाव के दौरान एनडीए के सहयोगी दलों की मांगों पर भी विशेष ध्यान दिया जा सकता है। लोजपा-रामविलास के अध्यक्ष चिराग पासवान मौजूदा खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की तुलना में बड़ा मंत्रालय चाहते हैं।
महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे भी एक और कैबिनेट पद की मांग कर रहे हैं। शिवसेना के पास लोकसभा में 13 सांसद हैं। इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच बातचीत हो चुकी है। साथ ही शिवसेना और एनसीपी के दोनों धड़ों से जुड़े मामलों को जल्द निपटाने की हिदायत भी दी गई है।
तमिलनाडु में द्रमुक को भी केंद्र सरकार में जगह दिए जाने की संभावना की चर्चा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद द्रमुक को एनडीए के साथ लाने की कोशिशों की कमान संभाल रहे हैं।
यूपी से केशव मौर्य या ब्रजेश पाठक की दिल्ली वापसी?
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक में से किसी एक को केंद्र में लाए जाने की चर्चा है।
अमरपाल मौर्य को भाजपा ओबीसी मोर्चा की जिम्मेदारी मिलने के बाद केशव प्रसाद मौर्य का नाम खास तौर पर चर्चा में आया है। हालांकि ब्रजेश पाठक भी संभावित विकल्प माने जा रहे हैं। दोनों में से किसी एक को केंद्र में लाने से उत्तर प्रदेश में भाजपा के सामाजिक और राजनीतिक समीकरण को नया संतुलन देने में मदद मिल सकती है।
हिमाचल से अनुराग ठाकुर की भूमिका अहम
हिमाचल प्रदेश से जेपी नड्डा और अनुराग ठाकुर भाजपा के दो बड़े चेहरे हैं। आगामी चुनावी जरूरत और सामाजिक समीकरणों को देखते हुए अनुराग ठाकुर की भूमिका को लेकर भी महत्वपूर्ण फैसला हो सकता है।
कुल मिलाकर संभावित कैबिनेट फेरबदल में क्षेत्रीय संतुलन, जातीय समीकरण, महिला प्रतिनिधित्व और सहयोगी दलों की मांगों के साथ आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति को प्राथमिकता मिलने की संभावना है।


