वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत की चुनाव व्यवस्था का हवाला देते हुए अमेरिका में चुनावी नियमों को और सख्त करने की पैरवी की है। ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर कहा कि भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने उनसे सवाल किया था कि अमेरिका में वैध फोटो ID के बिना चुनाव कैसे कराए जाते हैं। ट्रम्प ने इसके बाद SAVE America Act को पारित करने की अपील की।
ट्रम्प का कहना है कि अमेरिकी चुनावों में मतदाताओं की पहचान और नागरिकता को लेकर सख्त नियम होने से चुनाव प्रक्रिया की सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ेगी। भारत की वोटर पहचान व्यवस्था को अमेरिकी चुनाव सुधार की बहस में उदाहरण के तौर पर पेश करना इस मुद्दे को और चर्चा में ले आया है।
क्या है SAVE America Act?
Safeguard American Voter Eligibility Act, यानी SAVE America Act, अमेरिकी संघीय चुनावों में मतदाता पंजीकरण और मतदान से जुड़े नियमों को सख्त करने वाला विधेयक है। इसके तहत मतदाता पंजीकरण के समय अमेरिकी नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण और मतदान के समय फोटो ID की व्यवस्था का प्रस्ताव है।
विधेयक अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से फरवरी 2026 में पारित हो चुका है और सीनेट में इस पर आगे विचार चल रहा है। प्रस्ताव में संघीय चुनावों के लिए मतदाता पंजीकरण के दौरान नागरिकता साबित करने के लिए पासपोर्ट, जन्म प्रमाणपत्र के साथ सरकारी फोटो ID और अन्य निर्धारित दस्तावेजों जैसे विकल्प शामिल हैं।
ट्रम्प क्यों दे रहे हैं SAVE America Act पर जोर
ट्रम्प और उनके समर्थकों का तर्क है कि मतदाता की पहचान और नागरिकता की पुष्टि के लिए सख्त नियम चुनावों की विश्वसनीयता बढ़ा सकते हैं। ट्रम्प लंबे समय से अमेरिकी चुनाव व्यवस्था में मतदाता पहचान और नागरिकता संबंधी नियमों को मजबूत करने की मांग करते रहे हैं।
वहीं, डेमोक्रेट्स और कई मतदान अधिकार संगठनों का कहना है कि अतिरिक्त दस्तावेजी शर्तें वैध मतदाताओं के लिए मतदान या पंजीकरण की प्रक्रिया को मुश्किल बना सकती हैं।
12% मतदाताओं के पास जरूरी दस्तावेज नहीं
गैर-दलीय Bipartisan Policy Center के विश्लेषण के मुताबिक, करीब 12% पंजीकृत मतदाताओं के पास उन दस्तावेजों तक आसान पहुंच नहीं है, जिन्हें SAVE America Act के तहत नागरिकता प्रमाण के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। यह संख्या करीब 2.84 करोड़ मतदान आयु के नागरिकों के बराबर बताई गई है।
BPC के अनुसार, आय और शिक्षा के स्तर के आधार पर भी दस्तावेज उपलब्ध होने में अंतर है। आलोचकों का तर्क है कि ऐसे नियम उन पात्र मतदाताओं के लिए बाधा बन सकते हैं, जिनके पास पासपोर्ट या जन्म प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।
अमेरिका में वोटर ID को लेकर लंबे समय से बहस
अमेरिका में मतदान के लिए पहचान पत्र की अनिवार्यता को लेकर लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी बहस चलती रही है। समर्थकों का कहना है कि फोटो ID और नागरिकता प्रमाण से चुनावी प्रक्रिया में भरोसा बढ़ सकता है। विरोधियों का तर्क है कि गैर-नागरिकों का संघीय चुनाव में मतदान पहले से प्रतिबंधित है और अतिरिक्त दस्तावेजी शर्तें गलत तरीके से वैध मतदाताओं को प्रभावित कर सकती हैं।
SAVE America Act को लेकर बहस सिर्फ फोटो ID तक सीमित नहीं है। विधेयक मतदाता पंजीकरण के समय नागरिकता के दस्तावेजी प्रमाण और संघीय चुनावों में मतदान के समय पात्र फोटो पहचान पत्र की शर्त भी प्रस्तावित करता है।
भारत और अमेरिका की चुनाव व्यवस्था में अंतर
भारत में मतदान के लिए मतदाता की पहचान सुनिश्चित करने के लिए फोटोयुक्त पहचान पत्र की व्यवस्था लंबे समय से लागू है। अमेरिका में संघीय स्तर पर भारत जैसी एक समान अनिवार्य फोटो ID व्यवस्था नहीं है; अलग-अलग राज्यों में पहचान संबंधी नियम अलग हो सकते हैं।
इसी अंतर को लेकर ट्रम्प ने भारत की चुनाव व्यवस्था का हवाला दिया है। भारतीय मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए ट्रम्प ने अमेरिकी चुनाव व्यवस्था में फोटो ID की भूमिका को लेकर सवाल उठाया और SAVE America Act को आगे बढ़ाने की मांग की।


