नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस 2026 के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए विकसित भारत, आत्मनिर्भरता, युवाओं, तकनीक, महिला सशक्तिकरण और राष्ट्रीय सुरक्षा पर सरकार का विजन सामने रखा। प्रधानमंत्री ने 76 मिनट के संबोधन में कहा कि भारत अब छोटे सपनों से आगे बढ़ चुका है और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अगले 5 से 7 वर्ष निर्णायक होंगे।
पीएम मोदी ने अपने भाषण में सबसे तीखी टिप्पणी तथाकथित ‘दिमागी नक्सलियों’ को लेकर की। उन्होंने कहा कि हथियारबंद नक्सलवाद कमजोर हुआ है, लेकिन अब ऐसे तत्वों से सावधान रहने की जरूरत है जो युवाओं को भटकाने और समाज को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने ऐसे लोगों को पहचानने और अलग-थलग करने की जरूरत बताई।
2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा तय कर ली है। इसके लिए केवल नीतियों में बदलाव पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि वर्क कल्चर और सोच में बदलाव भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि पिछले 5-7 दशकों में जो काम नहीं हो सके, उन्हें अगले 5-7 वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ना होगा।
उन्होंने देश के विकास के लिए ‘शक्ति की सप्तधारा’ का उल्लेख करते हुए मैन्युफैक्चरिंग, किसान और फूड प्रोसेसिंग, टेक्नोलॉजी एवं इनोवेशन, गति शक्ति, रक्षा शक्ति, ग्रीन एवं ब्लू इकोनॉमी और सॉफ्ट पावर जैसे क्षेत्रों को महत्वपूर्ण बताया।
एक साल में एक करोड़ युवाओं को AI स्किल्स की ट्रेनिंग
युवाओं को संबोधन का प्रमुख केंद्र बनाते हुए पीएम मोदी ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि सरकार अगले एक साल में एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्किल्स की ट्रेनिंग देगी। इसके साथ ही गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के युवाओं के लिए विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की फ्री ऑनलाइन कोचिंग व्यवस्था भी शुरू की जाएगी।
प्रधानमंत्री ने युवाओं को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और उभरते क्षेत्रों में देश को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाने का आह्वान किया।
आत्मनिर्भर भारत पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि भारत को दूसरे देशों पर निर्भर होकर नहीं रहना है। दुनिया में कई वस्तुएं सस्ती और आसानी से उपलब्ध हैं, लेकिन केवल आयात पर निर्भरता देश की क्षमताओं का निर्माण नहीं करती। इसलिए भारत को अपनी उत्पादन क्षमता और तकनीकी सामर्थ्य बढ़ानी होगी।
उन्होंने सेमीकंडक्टर, मैन्युफैक्चरिंग और घरेलू उत्पादन को आत्मनिर्भर भारत की बुनियाद बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में तीन सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू हो चुके हैं और वहां से निर्यात भी शुरू हो गया है।
मैन्युफैक्चरिंग में दुनिया का भरोसेमंद केंद्र बनने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को छोटे पुर्जों से लेकर पूरी मशीनरी तक मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने उद्योग जगत से वैश्विक बाजार में गुणवत्ता और विश्वसनीयता के साथ भारतीय उत्पादों की पहचान बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत के टेक्सटाइल, मशीनरी, दवाइयां और दूसरे उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की जरूरत है। पंजाब के लुधियाना से तमिलनाडु के तिरुपुर तक फैले टेक्सटाइल सेक्टर को दुनिया में अपनी मजबूत पहचान बनाने की क्षमता है।
किसान और फूड प्रोसेसिंग पर फोकस
‘सप्तधारा’ में प्रधानमंत्री ने किसान और फूड प्रोडक्शन-प्रोसेसिंग को दूसरी प्रमुख शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि भारत के मसाले, फल, फूल और खान-पान से जुड़े उत्पादों को वैश्विक बाजार में बड़ी पहचान दिलाई जा सकती है।
AI, क्वांटम और डेटा सेंटर का दौर
प्रधानमंत्री ने टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को विकास की तीसरी शक्ति बताते हुए कहा कि दुनिया अब डेटा सेंटर, AI और क्वांटम टेक्नोलॉजी के दौर में है। भारत को इनोवेशन का वैश्विक हब बनाने और अपनी डिजिटल पब्लिक टेक्नोलॉजी को दुनिया के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने की दिशा में काम करना होगा।
रक्षा और साइबर सुरक्षा भी प्राथमिकता
सप्तधारा की पांचवीं शक्ति के रूप में रक्षा शक्ति का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत का रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ना देश और दुनिया ने अनुभव किया है। उन्होंने साइबर सुरक्षा को भी हर घर से जुड़ी चुनौती बताते हुए इसमें युवा शक्ति की भूमिका पर जोर दिया।
ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी पर जोर
प्रधानमंत्री ने ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल एनर्जी, एनर्जी स्टोरेज, ग्रीन मोबिलिटी और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग को भविष्य की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। इसके साथ ही समुद्री अर्थव्यवस्था में भारत की लंबी तटरेखा, मत्स्य पालन, कोस्टल टूरिज्म और समुद्री तकनीक की संभावनाओं का उल्लेख किया।
ऊर्जा सुरक्षा और तेल आयात पर चिंता
पीएम मोदी ने कहा कि ऊर्जा के बिना आधुनिक दुनिया आगे नहीं बढ़ सकती। भारत को बड़ी मात्रा में बिजली की जरूरत होगी, इसलिए ऊर्जा सुरक्षा समय की मांग है। उन्होंने समुद्र में तेल और गैस के नए भंडार तलाशने तथा ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की जरूरत बताई।
महिला आरक्षण पर राजनीतिक दलों से अपील
प्रधानमंत्री ने महिला आरक्षण को लेकर देश के राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान और उनकी राजनीतिक भागीदारी के लिए सभी दलों को आगे आना चाहिए और महिला आरक्षण लागू करने में सहयोग करना चाहिए।
‘वोकल फॉर लोकल’ और स्वदेशी पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि मेक इन इंडिया, स्वदेशी और वोकल फॉर लोकल अब भारतीयों की सोच का हिस्सा बन रहे हैं। उन्होंने सेमीकंडक्टर निर्माण को भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि चिप के बिना आधुनिक दुनिया की कल्पना मुश्किल है।
प्रधानमंत्री ने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में रक्षा उत्पादन चार गुना, खादी एवं ग्रामोद्योग पांच गुना, इलेक्ट्रिक मैन्युफैक्चरिंग सात गुना, रेलवे कोच निर्माण 21 गुना और मोबाइल फोन उत्पादन 33 गुना बढ़ा है। डिजिटल ट्रांजेक्शन में भी बड़ी वृद्धि का उल्लेख उन्होंने अपने भाषण में किया।
25 करोड़ लोगों के गरीबी से बाहर आने का दावा
पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में 25 करोड़ देशवासी गरीबी से बाहर आए हैं और भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों के संकल्प को रोकना मुश्किल है।
13वीं बार लाल किले से तिरंगा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से 13वीं बार तिरंगा फहराया। इसके बाद राष्ट्रगान हुआ और 21 तोपों की सलामी दी गई। इस बार लाल किले पर पहली बार वंदे मातरम भी गाया गया।
पीएम मोदी का 2026 का संबोधन 76 मिनट का रहा। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार यह लाल किले से उनके तीसरे सबसे छोटे भाषणों में शामिल है। 2022 में उनका संबोधन 74 मिनट और 2014 में 65 मिनट का था, जबकि 2025 में उन्होंने 103 मिनट का सबसे लंबा भाषण दिया था।
प्रधानमंत्री ने अंत में कहा कि देश अब छोटे सपनों से नहीं चल सकता। बड़े सपने सोच का विस्तार करते हैं और मजबूत संकल्प कठिन परिस्थितियों में भी रास्ता निकालने की क्षमता देते हैं। उनका संदेश स्पष्ट रहा—भारत को अगले दो दशकों में विकसित, आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली राष्ट्र बनाने के लिए युवा शक्ति, तकनीक, उत्पादन और आत्मविश्वास को साथ लेकर आगे बढ़ना होगा।


