भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार एक बार फिर कमजोर पड़ गई है। प्रदेश में अब तक हुई बारिश सामान्य औसत से करीब 20 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य में कई जिलों में बारिश की कमी बनी हुई है। शनिवार को पन्ना, सतना और रीवा में तेज बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम विभाग ने इन जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान भारी बारिश की संभावना जताई है। अनुमान है कि कुछ स्थानों पर करीब 4 इंच तक पानी गिर सकता है। वहीं प्रदेश के अन्य हिस्सों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी के आसार हैं।
राजधानी भोपाल सहित इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर में भी हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है।
प्रदेश में 4.2 इंच बारिश की कमी
मध्य प्रदेश में अब तक औसतन 16.8 इंच बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि तक करीब 21 इंच पानी गिरना चाहिए था। यानी प्रदेश में करीब 4.2 इंच बारिश कम हुई है।
प्रदेश में सामान्य मानसूनी बारिश का औसत करीब 37.3 इंच है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अगस्त में अच्छी बारिश नहीं हुई तो कई जिलों में जल संकट और कृषि पर असर बढ़ सकता है।
49 जिलों में सामान्य से कम बारिश
प्रदेश के 49 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे बना हुआ है। इनमें अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया सहित कई जिले शामिल हैं।
पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, शहडोल, रीवा और सागर संभाग में बारिश की कमी करीब 23 प्रतिशत तक दर्ज की गई है। कई जिलों में यह कमी 5 से 48 प्रतिशत तक है।
पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी स्थिति बहुत बेहतर नहीं है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग में औसतन करीब 17 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
सिर्फ 6 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
प्रदेश के केवल 6 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इनमें ग्वालियर, भिंड, बुरहानपुर, देवास, खंडवा, खरगोन शामिल हैं।
दतिया में 24 घंटे में साढ़े 3 इंच बारिश
शुक्रवार को दतिया में बारिश ने जोर पकड़ा। यहां 24 घंटे में करीब साढ़े 3 इंच पानी गिरा। तेज बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी और स्कूलों में छुट्टी घोषित करनी पड़ी।
सीधी जिले के भंवरसेन घाट पर तेज बारिश के बाद सोन नदी के पुल पर पानी आ गया, जिससे करीब 40 गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ। वहीं रायसेन में भी तेज बारिश के बाद कई सड़कों पर जलभराव की स्थिति बनी।
खरगोन, सतना, उज्जैन, ग्वालियर और रीवा समेत कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई।
25 प्रतिशत से ज्यादा कमी पर माना जाता है सूखा
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य औसत से 25 प्रतिशत या उससे अधिक बारिश की कमी होने और इसका असर फसल, मिट्टी की नमी और भूजल स्तर पर पड़ने पर सूखे की स्थिति मानी जाती है।
फिलहाल मध्य प्रदेश में कई जिलों में बारिश की कमी जरूर है, लेकिन अभी तक किसी जिले को आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया है। सूखे का अंतिम आकलन मानसून समाप्त होने के बाद किया जाता है।
जून-जुलाई दोनों में कमजोर रहा मानसून
इस साल मानसून की शुरुआत से ही बारिश का आंकड़ा कमजोर रहा। जून में प्रदेश में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई। जुलाई में कुछ समय अच्छी बारिश हुई, लेकिन मानसून सिस्टम कमजोर पड़ने से फिर कमी बढ़ गई।
अब अगस्त में प्रदेश को अच्छी बारिश का इंतजार है। मौसम विभाग के अनुसार, पन्ना, सतना और रीवा में होने वाली तेज बारिश से पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में बारिश की कमी कम हो सकती है।


