-महेश दीक्षित
भोपाल। दतिया की हार ने ‘कमल दल’ के जिलाध्यक्षों की नींद उड़ा दी है। पार्टी में इन दिनों एक ही सवाल उठ रहा है कि, अब अगला नंबर किसका? दतिया में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के प्रभाव वाले जिलाध्यक्ष और पूरी जिला कार्यकारिणी की विदाई को तो अभी ट्रेलर माना जा रहा है, असली फिल्म अभी बाकी है। भाजपा नेतृत्व ने अब उन सभी जिला इकाइयों की फाइलें खोल ली हैं, जहां संगठन पर पार्टी से ज्यादा किसी मंत्री, विधायक या सांसद का प्रभाव माना जाता है। दतिया में टिकट कटने के बाद जिस तरह जिला संगठन के तेवर बदले और फिर उपचुनाव में पार्टी प्रत्याशी की हार हुई, उसने भोपाल तक कई संदेश पहुंचा दिए। अब पार्टी नेतृत्व यह संदेश देने के मूड में है कि पार्टी से बड़ा कोई नहीं। बताते हैं कि इसके बाद बालाघाट, अनूपपुर, नरसिंहपुर, विदिशा, रायसेन और नर्मदापुरम समेत करीब दर्जनभर जिलों के अध्यक्षों पर कभी भी गाज गिर सकती है। इन जिलों के अध्यक्ष भी ‘कमल’ के लिए कम, अपने-अपने नेताओं के लिए ज्यादा सक्रिय हैं। नारदजी कहते हैं कि भोपाल का संदेश साफ है- अब भाजपा में नेता निष्ठा नहीं, सिर्फ संगठन निष्ठा ही चलेगी।
‘रेसू’ ने उड़ाई राजनीतिक गलियारों की नींद!
प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एक ‘रेसू’ नाम की सुदर्शना की चर्चाएं हैं। चर्चा है कि ‘रेसू’ से जुड़ी एक ‘पेन ड्राइव’ बाजार में आई हुई है। इसमें प्रदेश के कुछ नामचीन नेताओं के रागात्मक दृश्य हैं। हालांकि, मप्र की राजनीति में ‘पेन ड्राइव-सीडी’ के जरिए चरित्र हनन की चर्चाएं नई नहीं हैं। इससे पहले भी सागर की ‘हनियों’ की चर्चित सीडी राजनीतिक गलियारों में खूब हलचल मचा चुकी है। नारदजी कहते हैं कि जब से ‘पेन ड्राइव’ की चर्चा बाजार में फैली है, सत्ता-संगठन के गलियारों की नींद उड़ी हुई है। आलम यह है कि चरित्र उजागर होने के डर से हर ‘रागी नेता’ डरा हुआ है ।
मामा को छोड़ श्रीमंत की हुजूरी में सांसदजी!
सियासतदां कैसे अपना चाल-चरित्र बदलते हैं, यह देखना-परखना है, तो कभी मामा के सबसे खास कहे जाने वाले एक सांसदजी की सोशल मीडिया पर नजर-ए-इनायत कर लीजिए। जी हां, मामा के दिल्ली जाते ही, सांसदजी के पाला बदलने की राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा है। आजकल सांसदजी श्रीमंत के दरबार में हुक्म बजाते देखे जा रहे हैं। सांसद जी को लगने लगा है कि राजनीतिक भविष्य अब मामा की नहीं, श्रीमंत की जी-हुजूरी में है। नारदजी बता दें कि यह वही सांसदजी हैं, जिन्हें कभी महापौर बनाने के लिए मामा ने सपत्नीक भोपाल की गलियों की खाक छानी थी।
सुदर्शना अधिकारी फिर विवादों में…!
महाकौशल के एक जिले की एक सुदर्शना अधिकारी इन दिनों फिर चर्चाओं में हैं। चर्चा है कि रिश्वत लेने के आरोपों के बाद उनकी सारी पावरें कट कर दी गई हैं। वैसे, यह पहला मौका नहीं है जब इस ‘सुदर्शना’ अधिकारी का नाम विवादों से जुड़ा हो। राजधानी में पदस्थापना के दौरान भी रागात्मक किस्सों और अपने पारिवारिक विवादों को लेकर उनका नाम चर्चाओं में रहा था। महकमे के ही एक अधिकारी, जिन्होंने कभी उनके साथ काम किया है, बताते हैं कि, जहां-जहां इस ‘सुदर्शना’ अधिकारी की पोस्टिंग होती है, वहां-वहां विवाद भी मानो सरकारी वाहन में साथ ही पहुंच जाते हैं। अब देखना यह है कि इस बार मामला सिर्फ चर्चाओं तक सीमित रहता है या आगे ‘सुदर्शना’ अधिकारी की कोई नई पटकथा लिखी जाती है।
प्राचार्य की ‘मोहिनी’ पूरे प्रशासन पर भारी!
केंद्रीय मंत्री (मामा) के गृहनगर में इन दिनों एक कन्या विद्यालय की प्राचार्य मैडम अपनी कार्यशैली को लेकर खासी चर्चाओं में हैं। कहते हैं कि मैडम की रुचि पढ़ाई-लिखाई और शैक्षणिक गतिविधियों से ज्यादा दूसरे कामों में दिखाई देती है। हालात ऐसे हैं कि जो अधीनस्थ उनके मनमाने या गैर-जरूरी निर्देशों का पालन न करे, तो उसे निलंबन की धमकी देकर डराया जाता है। मैडम राज्य मंत्रालय में बैठे अपने कुछ ‘शुभचिंतकों’ का नाम लेकर पूरे स्कूल शिक्षा महकमे में अपना रौब दिखाती हैं। मैडम की मनमानी कार्यशैली को लेकर जिला प्रशासन तक कई शिकायतें पहुंच चुकी हैं, लेकिन मजाल कोई मैडम पर नकेल कस सके। अब यह मैडम की पहुंच का असर है, उनकी ‘मोहिनी’ का कमाल है? फिलहाल मैडम की कार्यशैली मामा के गृहनगर में गजब ढा रही है।


