आशुतोष तिवारी ने समीक्षा बैठक में ऑडियो-वीडियो किए पेश, रिपोर्ट के बाद नेताओं पर कार्रवाई के संकेत
भोपाल। दतिया विधानसभा उपचुनाव में मिली अप्रत्याशित हार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई समीक्षा बैठक में चुनावी हार के कारणों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके बाद प्रदेश संगठन ने हार की विस्तृत समीक्षा के लिए दो सदस्यीय जांच समिति का गठन कर दिया।
प्रदेश महामंत्री गौरव रणदीवे और पूर्व संगठन मंत्री अंबाराम कराडा को समिति की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दोनों नेता चुनाव प्रचार में शामिल मंत्रियों, विधायकों, जनप्रतिनिधियों और पार्टी पदाधिकारियों से अलग-अलग चर्चा कर हार के कारणों का विश्लेषण करेंगे। समिति अपनी रिपोर्ट प्रदेश संगठन के माध्यम से भाजपा हाईकमान को सौंपेगी, जिसके आधार पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।
बैठक में भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने चुनाव के दौरान कथित भीतरघात को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने अपने दावों के समर्थन में कुछ ऑडियो और वीडियो भी बैठक में प्रस्तुत किए। सूत्रों के मुताबिक, इन तथ्यों की भी जांच समिति विस्तार से पड़ताल करेगी।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट के आधार पर दतिया जिले के कुछ नेताओं और पदाधिकारियों पर संगठनात्मक कार्रवाई हो सकती है। प्रदेश नेतृत्व इस हार को केवल चुनावी पराजय नहीं, बल्कि संगठनात्मक अनुशासन के नजरिए से भी देख रहा है।
दतिया में क्या रहा चुनाव परिणाम?
-भाजपा के गढ़ में कांग्रेस की बड़ी जीत
-दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से हराया।
-दतिया को भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा का मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है।
-लगातार दूसरी चुनावी हार के बाद भाजपा नेतृत्व ने चुनावी रणनीति और संगठनात्मक कार्यप्रणाली की समीक्षा शुरू कर दी है।
भितरघात के आरोपों पर बढ़ी सियासी हलचल
-प्रत्याशी ने पेश किए ऑडियो-वीडियो, जांच समिति करेगी पड़ताल
-समीक्षा बैठक में भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान पार्टी के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अपेक्षित सहयोग नहीं किया।
-उन्होंने अपने दावों के समर्थन में कुछ ऑडियो और वीडियो भी प्रस्तुत किए। -जांच समिति इन सभी बिंदुओं की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी।
-रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार नेताओं और पदाधिकारियों के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।


