भोपाल। मध्यप्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव इस बार बेहद दिलचस्प और प्रतिष्ठा का मुकाबला बन गया है। 30 जुलाई को होने वाले मतदान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आशुतोष तिवारी और कांग्रेस के घनश्याम सिंह आमने-सामने हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में जातीय समीकरण, प्रत्याशियों की व्यक्तिगत छवि और संगठन की ताकत तीनों निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
भाजपा को अपने पारंपरिक ब्राह्मण, वैश्य और सवर्ण वोट बैंक के साथ ओबीसी मतदाताओं पर भरोसा है। वहीं कांग्रेस को उम्मीद है कि उसका पारंपरिक दलित और अल्पसंख्यक वोट बैंक उसके पक्ष में मजबूती से खड़ा रहेगा। घनश्याम सिंह दो बार विधायक रह चुके हैं और राजपरिवार से जुड़े होने के कारण क्षेत्र में उनकी व्यक्तिगत पकड़ भी मजबूत मानी जाती है।
दतिया ही नहीं, ग्वालियर-चंबल अंचल की राजनीति लंबे समय से जातीय समीकरणों से प्रभावित रही है। ऐसे में किसी एक समाज का समर्थन चुनाव परिणाम तय करने के लिए पर्याप्त नहीं माना जा रहा। दोनों प्रमुख दल अलग-अलग सामाजिक वर्गों को अपने पक्ष में करने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं।
ब्राह्मण वोट भाजपा की बड़ी ताकत
दतिया विधानसभा में ब्राह्मण समाज की आबादी करीब 14.8 प्रतिशत मानी जाती है, जो सबसे बड़ा सामाजिक वर्ग है। भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी इसी समाज से आते हैं। पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा भी उनके समर्थन में सक्रिय हैं। भाजपा की रणनीति ब्राह्मणों के साथ सवर्ण और वैश्य मतदाताओं को एकजुट बनाए रखने की है।
दलित वोट बैंक पर कांग्रेस की नजर
अहिरवार-जाटव समाज की हिस्सेदारी लगभग 14.7 प्रतिशत बताई जाती है। कांग्रेस इस वर्ग को अपना पारंपरिक वोट बैंक मानती है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार यदि दलित मतदाता बड़ी संख्या में कांग्रेस के साथ आते हैं तो मुकाबला भाजपा के लिए कठिन हो सकता है।
कुशवाहा-काछी समाज निभा सकता है निर्णायक भूमिका
करीब 12.2 प्रतिशत आबादी वाले कुशवाहा-काछी समाज को इस चुनाव का ‘किंगमेकर’ माना जा रहा है। भाजपा और कांग्रेस दोनों इस वर्ग को अपने पक्ष में करने के लिए लगातार संपर्क अभियान चला रहे हैं। इस समाज का रुख चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है।
यादव और लोधी वोट भी अहम
दतिया में यादव समाज की आबादी करीब 7.4 प्रतिशत और लोधी समाज की 6.9 प्रतिशत मानी जाती है। दोनों मिलाकर 14 प्रतिशत से अधिक वोट बनते हैं। भाजपा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल समेत कई प्रभावशाली नेताओं को प्रचार में उतारकर इन वर्गों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है।
घनश्याम सिंह की व्यक्तिगत छवि कांग्रेस की ताकत
कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह दो बार विधायक रह चुके हैं और क्षेत्र में उनकी व्यक्तिगत पहचान मजबूत मानी जाती है। स्थानीय मुद्दों और जनसंपर्क के आधार पर कांग्रेस को उम्मीद है कि वह परंपरागत दलित, अल्पसंख्यक और अन्य वर्गों में बेहतर समर्थन हासिल कर सकती है।
कांटे का मुकाबला, कम अंतर से फैसला संभव
वरिष्ठ पत्रकार गणेश साकल्ले का मानना है कि दतिया में मुकाबला बेहद कड़ा है। भाजपा जातीय समीकरण और संगठनात्मक मजबूती के दम पर चुनाव लड़ रही है, जबकि कांग्रेस घनश्याम सिंह की व्यक्तिगत छवि और स्थानीय जुड़ाव पर भरोसा कर रही है। उनका कहना है कि भाजपा का परंपरागत सवर्ण, वैश्य और ओबीसी वोट बैंक उसके लिए मजबूत आधार है, जबकि कांग्रेस के लिए दलित मतदाताओं का पूरा समर्थन निर्णायक साबित हो सकता है। ऐसे में जीत-हार का अंतर काफी कम रहने की संभावना है।
दतिया विधानसभा का प्रमुख जातीय गणित
| समाज | अनुमानित आबादी |
|---|---|
| ब्राह्मण | 14.8% |
| अहिरवार-जाटव | 14.7% |
| कुशवाहा-काछी | 12.2% |
| यादव | 7.4% |
| लोधी | 6.9% |
| बघेल-पाल | 5.3% |
| मुस्लिम | 3.7% |
| बनिया | 3.7% |
| ठाकुर-राजपूत | 3.0% |
| रावत (मीणा) | 2.9% |


