साजिश की जांच जारी, CCTV, मोबाइल डेटा और फेस रिकग्निशन से जुटाए जा रहे सबूत
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक मामले को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों में दर्ज मामलों को वापस लेने की केंद्र सरकार की घोषणा के बावजूद दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वह केवल सक्षम प्राधिकारी से आधिकारिक आदेश मिलने के बाद ही इस संबंध में कार्रवाई करेगी। हालांकि, पुलिस ने साफ कर दिया है कि हिंसा के पीछे कथित बड़ी साजिश की जांच पहले की तरह जारी रहेगी।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, 20 जुलाई को हुई हिंसक घटनाओं और उसके बाद हुए प्रदर्शनों के संबंध में नई दिल्ली जिले के विभिन्न थानों में अब तक 15 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस का कहना है कि एफआईआर वापस लेने का फैसला जांच प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करेगा।
शनिवार को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी)’ के प्रवक्ताओं सौरभ दास और अभिषेक रांका के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में घोषणा की थी कि सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने पर सहमत हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि मंगलवार तक सहमति बनी मांगों पर लिखित आश्वासन दिया जाएगा।
इस बीच दिल्ली पुलिस हिंसा की साजिश की जांच को तेज कर रही है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल साक्ष्य, मोबाइल फोन रिकॉर्ड और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर पूरी घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हिंसा की योजना किसने बनाई, किसने लोगों को उकसाया और किन लोगों की इसमें सक्रिय भूमिका रही।
पुलिस ने फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) की मदद से 2,500 से अधिक आपराधिक पृष्ठभूमि वाले संदिग्धों की पहचान की है, जो फिलहाल जांच एजेंसियों के रडार पर हैं।
20 जुलाई की हिंसा में 200 से अधिक पुलिसकर्मी और करीब 70 प्रदर्शनकारी घायल हुए थे। इसके अलावा कई सरकारी वाहन और सार्वजनिक संपत्तियां भी क्षतिग्रस्त हुई थीं।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि जैसे ही सक्षम प्राधिकारी से आधिकारिक आदेश प्राप्त होंगे, उसी के अनुरूप एफआईआर वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। लेकिन साजिश की जांच जारी रहेगी और अब तक जुटाए गए सभी साक्ष्यों का गहन परीक्षण किया जाएगा।


