नई दिल्ली। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को एक बार फिर सुनवाई करेगा। इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार से जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) के पुनर्गठन को लेकर अपना स्पष्ट रुख बताने की संभावना है।
सुप्रीम कोर्ट की कार्यसूची के अनुसार, मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ करेगी।
इन याचिकाओं पर होगी संयुक्त सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट चार अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करेगा। इनमें अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी, स्वयं पक्षकार अजय कुमार राय, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह और हिंदू धर्म परिषद की ओर से दायर याचिकाएं शामिल हैं।
याचिकाओं में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को प्राप्त दान और चढ़ावे के प्रबंधन की निष्पक्ष जांच, वित्तीय रिकॉर्ड सुरक्षित रखने तथा प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने दिए थे एसआईटी पर निर्देश
20 जुलाई को हुई पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से जांच कर रही एसआईटी के पुनर्गठन पर विचार करने को कहा था। अदालत की राय थी कि जांच का नेतृत्व एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को सौंपा जाए, ताकि जांच निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से अपने तार्किक निष्कर्ष तक पहुंच सके।
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी की थी कि “अदालतें राजनीति करने की जगह नहीं हैं।” साथ ही यह भी कहा था कि जांच किसी भी तरह के राजनीतिक प्रभाव से मुक्त और पूरी तरह निष्पक्ष होनी चाहिए।
सरकार ने बताया- जांच जारी, आठ आरोपी गिरफ्तार
सुनवाई के दौरान केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया था कि पहले दिए गए निर्देशों के अनुरूप स्थिति रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल कर दी गई है।
उन्होंने अदालत को बताया कि मामले की जांच जारी है और अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि, जांच प्रभावित न हो इसलिए विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में पुलिस अधीक्षक की निगरानी में जांच चल रही है, जबकि पहले गठित एसआईटी का उद्देश्य केवल प्रारंभिक तथ्यों की जांच करना था।
दान का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की भी उठी मांग
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने अदालत से अनुरोध किया कि मंदिर निर्माण और चढ़ावे से जुड़े सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के साथ उन्हें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाए, ताकि दानदाता यह सत्यापित कर सकें कि उनका योगदान सही तरीके से दर्ज हुआ है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करना व्यावहारिक नहीं हो सकता, लेकिन जहां रसीद जारी की गई है, वहां रिकॉर्ड का समुचित रखरखाव अनिवार्य होना चाहिए।
सीबीआई जांच और फॉरेंसिक ऑडिट की भी मांग
राजद सांसद सुधाकर सिंह ने अपनी याचिका में मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई को सौंपने की मांग की है। साथ ही अंतरिम निगरानी समिति गठित करने, व्यापक फॉरेंसिक ऑडिट कराने और ट्रस्ट की ऑडिटेड वित्तीय रिपोर्ट व दान का पूरा विवरण सार्वजनिक करने का भी अनुरोध किया गया है।
अब सुप्रीम कोर्ट की सोमवार की सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि जांच आगे किस दिशा में बढ़ेगी और एसआईटी के पुनर्गठन को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार क्या रुख अपनाती है।


