भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का पहला दिन सोमवार को जोरदार राजनीतिक टकराव का गवाह बना। सरकार द्वारा यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) विधेयक-2026 सदन में पेश किए जाने के साथ ही कांग्रेस ने तीखा विरोध शुरू कर दिया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि विधेयक को अनुपूरक कार्यसूची में चोरी-छिपे शामिल किया गया, जबकि भाजपा ने साफ कहा कि विरोध के बावजूद यूसीसी लागू होने से नहीं रुकेगा।
यूसीसी के अलावा सदन में किसानों के लिए खाद-बीज की उपलब्धता, कम बारिश की स्थिति और उज्जैन भूमि खरीद का मुद्दा भी जोरदार ढंग से उठा। दिनभर चली बहस और हंगामे के बाद विधानसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
UCC विधेयक पर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने
सरकार ने विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) विधेयक-2026 पेश किया, जिस पर मंगलवार को विस्तृत चर्चा होगी।
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने आरोप लगाया कि विधेयक को पहले सदन के पटल पर रखा गया और बाद में अनुपूरक कार्यसूची में जोड़ा गया। उन्होंने इसे “चोरी-छिपे लाया गया विधेयक” बताते हुए विरोध दर्ज कराया और संशोधन प्रस्ताव लाने की बात कही।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित कांग्रेस के अन्य विधायकों ने भी एक साथ कई विधेयक लाने के तरीके पर सवाल उठाए।
भाजपा का पलटवार: महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करेगा UCC
संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सभी विधेयक नियमों के अनुसार कार्य मंत्रणा समिति की बैठक के बाद सदन के पटल पर रखे गए हैं और सदस्यों को उन्हें पढ़ने का पूरा समय मिलेगा।
भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस चाहे जितना विरोध करे, यूसीसी लागू होने से नहीं रुकेगा। उन्होंने दावा किया कि यह कानून महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करेगा और बहुविवाह जैसी प्रथाओं पर रोक लगाने में मददगार साबित होगा।
वहीं कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा कि प्रदेश को यूसीसी नहीं, बल्कि यूनिफॉर्म एजुकेशन कोड की आवश्यकता है, जिससे सभी बच्चों को समान शिक्षा मिल सके।
खाद-बीज संकट पर सरकार और विपक्ष में लंबी बहस
दोपहर बाद नियम-139 के तहत किसानों को खाद-बीज की उपलब्धता और कम बारिश के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हुई।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार हर साल पर्याप्त खाद उपलब्ध होने का दावा करती है, लेकिन किसान आज भी खाद के लिए लंबी कतारों में खड़ा है। उन्होंने कहा कि किसानों को खाद नहीं, केवल आश्वासन मिल रहा है। उन्होंने पंचायत स्तर पर खाद वितरण और सरकार-विपक्ष की संयुक्त समिति बनाकर जमीनी स्थिति का आकलन करने की मांग की।
पूर्व कृषि मंत्री सचिन यादव ने कहा कि समस्या खाद के स्टॉक की नहीं, बल्कि वितरण व्यवस्था की है। कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने फसल बीमा कंपनियों पर किसानों के नुकसान से लाभ कमाने का आरोप लगाया, जबकि सोहनलाल वाल्मीकि ने कहा कि किसान अपनी फसल की कीमत तक तय नहीं कर पाता।
सरकार का दावा: पर्याप्त स्टॉक, कालाबाजारी पर कार्रवाई
कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने कहा कि प्रदेश में किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है। यदि किसी क्षेत्र में कमी है तो विधायक जानकारी दें, सरकार तत्काल आपूर्ति सुनिश्चित करेगी।
सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 27.10 लाख मीट्रिक टन खाद का स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि जहां भी अनियमितता और कालाबाजारी की शिकायत मिली, वहां लाइसेंस निरस्त किए गए और एफआईआर भी दर्ज कराई गई।
सारंग ने बताया कि 20 जुलाई तक प्रदेश में सामान्य से 16 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, लेकिन फिलहाल सूखे जैसी स्थिति नहीं है और सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।
उज्जैन भूमि खरीद मामले पर भी गरमाया सदन
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उज्जैन में भूमि खरीद के मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से चर्चा की मांग की। संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नियमों का हवाला देते हुए इसका विरोध किया। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई और हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी।


