भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है, जिसका असर बारिश के आंकड़ों पर साफ दिखाई दे रहा है। प्रदेश में अब तक औसतन 9.7 इंच बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस समय तक 11.4 इंच वर्षा हो जानी चाहिए थी। यानी राज्य में अब तक करीब 15 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है।
पिछले एक सप्ताह से अधिकांश जिलों में अच्छी बारिश नहीं होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। हालांकि मौसम विभाग ने राहत की उम्मीद जताई है। विभाग के अनुसार 20 जुलाई के बाद बंगाल की खाड़ी में नया लो-प्रेशर सिस्टम बनने की संभावना है, जिसके प्रभाव से मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो सकता है।
आज इन जिलों में बारिश की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार रविवार को रीवा, मऊगंज, मैहर, सीधी और सिंगरौली में गरज-चमक के साथ मध्यम बारिश हो सकती है।
वहीं रायसेन, इंदौर, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, बैतूल, नर्मदापुरम, पन्ना, दमोह, सतना, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, जबलपुर, कटनी, उमरिया, शहडोल और अनूपपुर सहित कई जिलों में हल्की बारिश की संभावना जताई गई है।
39 जिलों में सामान्य से कम बारिश
प्रदेश के 39 जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। इनमें रीवा, सतना, सागर, जबलपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट, डिंडौरी, सीधी, सिंगरौली, पन्ना, दमोह, कटनी, मंडला, नर्मदापुरम, रायसेन, विदिशा, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, बैतूल, गुना, शिवपुरी, मुरैना और दतिया जैसे जिले शामिल हैं।
दूसरी ओर भोपाल, इंदौर, उज्जैन, देवास, सीहोर, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, राजगढ़, नीमच और मंदसौर समेत 16 जिलों में बारिश की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बनी हुई है।
देवास सबसे आगे, अलीराजपुर सबसे पीछे
बारिश के आंकड़ों में देवास प्रदेश का सबसे आगे रहने वाला जिला है, जहां अब तक करीब 17.9 इंच बारिश हो चुकी है।
इसके विपरीत अलीराजपुर में केवल 2.3 इंच बारिश दर्ज हुई है, जो पूरे प्रदेश में सबसे कम है।
बारिश थमने से कई नदियों का जलस्तर फिर घटने लगा है। छोटे जलाशयों और बांधों में भी पानी की आवक कम हो गई है। यदि अगले कुछ दिनों तक अच्छी बारिश नहीं हुई तो जल भंडारण और खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है।
20 जुलाई के बाद बदल सकता है मौसम
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान कमजोर मौसम प्रणाली समाप्त होने के बाद 20 से 22 जुलाई के बीच बंगाल की खाड़ी में नया कम दबाव का क्षेत्र विकसित हो सकता है। इसके असर से मध्य प्रदेश में फिर से व्यापक बारिश होने की संभावना है।
9 दिन की देरी से आया था मानसून
इस वर्ष मानसून 24 जून को मध्य प्रदेश पहुंचा था, जो सामान्य तिथि से 9 दिन देर थी। जून में राज्य में सामान्य से करीब 30 प्रतिशत कम बारिश हुई। जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश हुई, लेकिन दूसरे सप्ताह में मानसून कमजोर पड़ने से बारिश का सिलसिला थम गया।
अब किसानों और आम लोगों की उम्मीदें अगले सप्ताह बनने वाले नए मौसम सिस्टम पर टिकी हैं।


