महिला आरक्षण विधेयक की चर्चा के बीच संघ का बड़ा कार्यक्रम
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अवसर आने जा रहा है। संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत पहली बार बड़ी संख्या में महिलाओं के साथ सीधे संवाद करेंगे। 24 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले विश्व मांगल्य सभा के मातृत्व सम्मेलन में भागवत मातृत्व, पारिवारिक मूल्यों और समाज निर्माण में महिला शक्ति की भूमिका पर अपना विचार रखेंगे।
यह कार्यक्रम संघ के शताब्दी वर्ष के तहत आयोजित होने वाले आयोजनों की श्रृंखला का हिस्सा है। संघ की स्थापना के 100 वर्षों में पहली बार कोई संघ प्रमुख आधी आबादी के साथ इस तरह प्रत्यक्ष संवाद करने जा रहा है।
उत्तर भारत की 280 महिला प्रतिनिधियां होंगी शामिल
नई दिल्ली स्थित डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों से करीब 280 महिला प्रतिनिधियां हिस्सा लेंगी।
कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर, लेह-लद्दाख, उत्तर प्रदेश के अवध, मालवा और महाकौशल क्षेत्र, गुजरात, राजस्थान, बिहार, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों की महिलाएं शामिल होंगी।
विश्व मांगल्य सभा के अनुसार, सम्मेलन में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय महिला नेतृत्व भी भाग लेगा। इसमें राजनीति, अर्थव्यवस्था, मनोरंजन, खेल और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख महिलाएं शामिल होंगी।
हैदराबाद में भी होगा भागवत का दूसरा व्याख्यान
महिलाओं से संवाद का दूसरा कार्यक्रम 25 और 26 जुलाई को हैदराबाद में आयोजित किया जाएगा। इसमें महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के राज्यों की महिला प्रतिनिधियां हिस्सा लेंगी।
विश्व मांगल्य सभा की राष्ट्रीय संगठन मंत्री वृषाली जोशी के मुताबिक, इन कार्यक्रमों का उद्देश्य महिला शक्ति, परिवार व्यवस्था और सामाजिक मूल्यों पर व्यापक चर्चा करना है।
महिला आरक्षण विधेयक की चर्चा के बीच कार्यक्रम
मोहन भागवत का यह संवाद ऐसे समय हो रहा है, जब संसद के मानसून सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है।
केंद्र सरकार इस विधेयक को पारित कराने के लिए सहयोगी दलों के साथ रणनीति तैयार कर रही है। इसी सिलसिले में 21 जुलाई को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की बैठक बुलाई गई है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे।
महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार को संसद में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। ऐसे में संघ प्रमुख का महिलाओं के साथ संवाद और संसद में महिला आरक्षण पर चर्चा, दोनों घटनाएं एक ही समय पर होने से राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
महिला शक्ति और सामाजिक भूमिका पर रहेगा फोकस
संघ से जुड़े सूत्रों के अनुसार, भागवत अपने संबोधन में महिलाओं की भूमिका, मातृत्व की अवधारणा, परिवार व्यवस्था और समाज निर्माण में महिलाओं के योगदान जैसे विषयों पर बात करेंगे।
यह कार्यक्रम संघ और उससे जुड़े संगठनों की ओर से महिला भागीदारी को लेकर बदलते सामाजिक विमर्श का हिस्सा माना जा रहा है।


