महिला के पूर्व पति की जगह जैविक पिता का नाम दर्ज करने का आदेश, कोर्ट बोला- जन्म प्रमाणपत्र में वास्तविक जानकारी होना जरूरी।
मुंबई। पति, पत्नी और तीसरे व्यक्ति से जुड़े एक अनोखे पारिवारिक विवाद में बॉम्बे हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने डीएनए जांच और दोनों जैविक माता-पिता के हलफनामे के आधार पर एक बच्ची के जन्म प्रमाणपत्र में दर्ज पिता का नाम बदलने का आदेश दिया है।
अदालत ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) को निर्देश दिया कि वह जन्म प्रमाणपत्र से महिला के पूर्व पति का नाम हटाकर बच्ची के जैविक पिता का नाम दर्ज करे और संशोधित जन्म प्रमाणपत्र जारी करे।
डीएनए रिपोर्ट बनी फैसले का आधार
कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति रंजीत सिंह भोंसले की खंडपीठ ने महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि जब डीएनए जांच और दोनों जैविक माता-पिता के संयुक्त हलफनामे से बच्ची के वास्तविक पिता की पहचान स्पष्ट हो चुकी है, तो जन्म प्रमाणपत्र में भी वही जानकारी दर्ज की जानी चाहिए।
अदालत ने माना कि सरकारी दस्तावेजों में सही और तथ्यात्मक जानकारी दर्ज होना आवश्यक है।
क्या है पूरा मामला?
याचिका के अनुसार, महिला का विवाह फरवरी 2006 में हुआ था। इस विवाह से कोई संतान नहीं हुई। समय के साथ पति-पत्नी के बीच मतभेद बढ़े और दोनों अलग-अलग रहने लगे।
इसी दौरान, जबकि तलाक का मामला अदालत में लंबित था और कानूनी रूप से विवाह समाप्त नहीं हुआ था, महिला का एक अन्य व्यक्ति से संबंध बना। दिसंबर 2009 में उसने एक बेटी को जन्म दिया।
वर्ष 2013 में महिला का अपने पहले पति से तलाक हो गया। इसके बाद उसने बच्ची के जैविक पिता से विवाह कर लिया।
क्यों दर्ज हुआ था पूर्व पति का नाम?
जब मार्च 2010 में बच्ची का जन्म प्रमाणपत्र बनाया गया, तब महिला कानूनी रूप से अपने पहले पति की पत्नी थी। इसी कारण नियमों के अनुसार जन्म प्रमाणपत्र में पिता के स्थान पर पूर्व पति का नाम दर्ज कर दिया गया।
पुनर्विवाह के बाद महिला ने बीएमसी से जन्म प्रमाणपत्र में संशोधन कर जैविक पिता का नाम दर्ज करने का अनुरोध किया, लेकिन बीएमसी ने नियमों का हवाला देकर आवेदन अस्वीकार कर दिया। इसके बाद महिला ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाई कोर्ट ने दिया संशोधित प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष डीएनए जांच रिपोर्ट और दोनों जैविक माता-पिता का संयुक्त हलफनामा प्रस्तुत किया गया। इन साक्ष्यों के आधार पर हाई कोर्ट ने बीएमसी को निर्देश दिया कि वह जन्म प्रमाणपत्र में दर्ज पूर्व पति का नाम हटाकर जैविक पिता का नाम दर्ज करे और नया जन्म प्रमाणपत्र जारी करे।


