भोपाल। मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले में 10 वर्षीय मूक-बधिर दिव्यांग बालिका से सामूहिक दुष्कर्म के चर्चित मामले में अदालत ने तीनों दोषियों को शेष प्राकृतिक जीवन तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक दोषी पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। साथ ही, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की विक्टिम कम्पेनसेशन योजना के तहत पीड़िता को 5 लाख रुपये का प्रतिकर देने के निर्देश दिए गए हैं।
मध्यप्रदेश पुलिस के अनुसार, वर्ष 2025 में दर्ज इस संवेदनशील मामले में घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्काल एफआईआर दर्ज कर पीड़िता को चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक राजीव कुमार मिश्रा के नेतृत्व में विशेष जांच दल गठित किया गया, जिसने महज 24 घंटे के भीतर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
जांच के दौरान पुलिस ने डीएनए सहित अन्य वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्य जुटाए। पीड़िता के मूक-बधिर होने के कारण उसके बयान सांकेतिक भाषा विशेषज्ञ की सहायता से दर्ज किए गए, ताकि उसकी कानूनी प्रक्रिया और अधिकारों का पूर्ण संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
पुलिस ने केवल 30 दिनों में विवेचना पूरी कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत कर दिया। प्रभावी अभियोजन और समयबद्ध सुनवाई के चलते करीब आठ महीने के भीतर अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए प्राकृतिक जीवन के शेष काल तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि महिलाओं, बालिकाओं और दिव्यांगजनों के खिलाफ अपराधों के प्रति मध्यप्रदेश पुलिस की जीरो टॉलरेंस नीति है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई, वैज्ञानिक जांच और प्रभावी अभियोजन के माध्यम से दोषियों को कठोर सजा दिलाना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अदालत ने अपने आदेश में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की विक्टिम कम्पेनसेशन स्कीम-2018 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए पीड़िता के पुनर्वास के लिए 5 लाख रुपये प्रतिकर प्रदान करने के भी निर्देश दिए हैं।


