भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने नर्मदा नदी के जल बंटवारे और राज्य के अधिकारों को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार ने नर्मदा से जुड़े मुद्दों पर गुजरात और केंद्र सरकार के सामने मध्य प्रदेश के हितों से समझौता किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से पूरे मामले पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की।
भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में कुणाल चौधरी ने कहा कि नर्मदा मध्य प्रदेश की जीवनरेखा है और इसका अधिकांश जलग्रहण क्षेत्र प्रदेश में होने के बावजूद राज्य अपने हिस्से के पानी का पूरा उपयोग नहीं कर पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में मध्य प्रदेश के हितों की अनदेखी की गई।
कांग्रेस नेता का दावा है कि नर्मदा वाटर डिस्प्यूट्स ट्रिब्यूनल के फैसले के तहत मध्य प्रदेश को 18.25 मिलियन एकड़ फीट (MAF) पानी आवंटित किया गया था, लेकिन प्रदेश आज भी अपने हिस्से के पूरे पानी का उपयोग नहीं कर पा रहा है। उन्होंने कहा कि कई सिंचाई परियोजनाएं और नहरें वर्षों से अधूरी हैं, जिससे किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा।
कुणाल चौधरी ने आरोप लगाया कि सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े डूब क्षेत्र की सरकारी जमीनों और संपत्तियों के मुआवजे में भी मध्य प्रदेश के साथ अन्याय हुआ। उनके अनुसार, गुजरात पर प्रदेश का ₹7,669 करोड़ का दावा था, लेकिन सरकार ने इसे छोड़कर उल्टे ₹550 करोड़ देने पर सहमति जताई, जो प्रदेश के हितों के खिलाफ है।
उन्होंने भाजपा सरकार पर विकास परियोजनाओं में देरी और लागत बढ़ने का भी आरोप लगाया। बरगी डायवर्जन परियोजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह परियोजना तय समय और लागत में पूरी नहीं हो सकी, जिससे किसानों और सिंचाई व्यवस्था को नुकसान हुआ।
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित हजारों आदिवासी परिवार आज भी पूर्ण पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं। पार्टी का कहना है कि विस्थापितों को सिंचित भूमि, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाएं अब तक पूरी तरह उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।
कुणाल चौधरी ने मुख्यमंत्री से नर्मदा परियोजनाओं की स्थिति, अधूरी सिंचाई योजनाओं, बरगी डायवर्जन परियोजना की बढ़ी लागत, विस्थापित परिवारों के पुनर्वास और प्रदेश के हिस्से के पूरे पानी के उपयोग की समयसीमा पर श्वेत पत्र जारी कर जनता के सामने तथ्य रखने की मांग की।


