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    ओला इलेक्ट्रिक पर बड़ा संकट: 40 करोड़ रुपये बकाया को लेकर दिवालिया याचिका

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    नई दिल्ली। भारत की प्रमुख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कंपनी Ola Electric Mobility एक बार फिर बड़े कानूनी विवाद में फंस गई है। कंपनी की ऑपरेटिंग यूनिट Ola Electric Technologies Private Limited के खिलाफ दो प्रमुख सप्लायर्स ने लगभग 40 करोड़ रुपये से अधिक के बकाया भुगतान को लेकर दिवालिया कार्यवाही शुरू करने की मांग की है।

    इन कंपनियों ने राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) में याचिका दायर करते हुए कहा है कि लंबे समय से भुगतान न मिलने के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है।

    किन कंपनियों ने दायर की याचिका?

    दो सप्लायर्स ने ओला इलेक्ट्रिक के खिलाफ यह कार्रवाई की है:

    स्टर्लिंग ई-मोबिलिटी सॉल्यूशंस लिमिटेड
    यह कंपनी इलेक्ट्रिक वाहन के लिए ट्रैक्शन मोटर्स, मोटर कंट्रोल यूनिट और DC कन्वर्टर्स जैसे अहम पार्ट्स सप्लाई करती है।
    अनेवोल्व मैंडो ई-मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड
    यह कंपनी EV इनवर्टर, कंट्रोलर और अन्य इलेक्ट्रिक कंपोनेंट्स सप्लाई करती है।

    दोनों का आरोप है कि ओला इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजीज ने उनके बिलों का भुगतान लंबे समय से नहीं किया है।

    कितना बकाया है?

    रिपोर्ट्स के अनुसार कुल बकाया राशि लगभग 40 करोड़ रुपये से अधिक है:

    स्टर्लिंग ई-मोबिलिटी: करीब 29.8 करोड़ रुपये
    अनेवोल्व मैंडो: करीब 10.8 करोड़ रुपये

    कहा जा रहा है कि यह भुगतान 45 दिनों से अधिक समय से लंबित है, जिसके बाद कंपनियों ने Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) की धारा 9 के तहत कार्रवाई की है।

    NCLT में क्या हो रहा है?

    बेंगलुरु बेंच में मामले की सुनवाई चल रही है। एक मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई तय। कंपनी की ओर से कैविएट दाखिल कर याचिकाओं का विरोध किया गया है।

    ओला इलेक्ट्रिक का पक्ष

    कंपनी ने आरोपों को स्वीकार नहीं किया है और अदालत में मजबूती से अपना पक्ष रख रही है। सूत्रों के अनुसार ओला इलेक्ट्रिक ने सप्लायर के दावों का विरोध किया है। कुछ कंपोनेंट्स की क्वालिटी को लेकर आपत्ति भी जताई गई है।
    कंपनी ने पहले भी इसी तरह के मामलों में भुगतान विवाद सुलझाए हैं
    पहले भी हो चुका है ऐसा मामला

    इससे पहले भी कंपनी पर Rosmerta Digital Services ने वाहन रजिस्ट्रेशन से जुड़े बकाया भुगतान को लेकर दिवालिया याचिका दायर की थी, हालांकि बाद में मामला आपसी समझौते से सुलझ गया था।

    कंपनी की वित्तीय स्थिति पर दबाव

    हाल के वित्तीय आंकड़ों के अनुसार:

    -राजस्व में लगभग 50% की गिरावट
    -बिक्री में 44% की कमी
    -भारी प्रतिस्पर्धा के चलते बाजार हिस्सेदारी में गिरावट
    -EV टू-व्हीलर मार्केट में कंपनी अब 5वें स्थान पर

    हालांकि कंपनी के घाटे में कुछ सुधार दर्ज हुआ है, लेकिन प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।

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