मप्र कांग्रेस भाजपा से पहले अपनों से क्यों लड़ रही है पार्टी?मध्य प्रदेश कांग्रेस एक बार फिर अपने आंतरिक विवादों को लेकर सुर्खियों में है। पूर्व प्रदेश महासचिव राकेश सिंह यादव के आरोप, उनका कथित इस्तीफा और पार्टी द्वारा निष्कासन का दावा इस बात का संकेत है कि संगठन के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। सवाल केवल एक नेता के असंतोष का नहीं, बल्कि उस माहौल का है जिसमें मतभेद अब बंद कमरों से निकलकर सार्वजनिक मंचों तक पहुंच चुके हैं।
लोकतांत्रिक दलों में मतभेद होना स्वाभाविक है। अलग-अलग विचार, नेतृत्व पर सवाल और संगठनात्मक फैसलों पर असहमति किसी भी बड़े राजनीतिक दल का हिस्सा हो सकते हैं। लेकिन जब ये मतभेद प्रेस कॉन्फ्रेंस, सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानबाजी का रूप ले लेते हैं, तब सबसे अधिक नुकसान पार्टी की साख और कार्यकर्ताओं के मनोबल को होता है।
मध्य प्रदेश में कांग्रेस पिछले कई वर्षों से मजबूत विपक्ष बनने की चुनौती से जूझ रही है। भाजपा का संगठन बूथ स्तर तक सक्रिय है और चुनावी रणनीति में लगातार बढ़त बनाए हुए है। ऐसे समय में कांग्रेस से अपेक्षा थी कि वह जनता के मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए अपनी पूरी ताकत लगाएगी। इसके विपरीत, पार्टी के भीतर ही आरोप-प्रत्यारोप और अनुशासन के विवाद अधिक चर्चा में हैं। इससे राजनीतिक संदेश यही जाता है कि संगठन अपनी आंतरिक चुनौतियों से पूरी तरह उबर नहीं पाया है।
यह पहला मौका भी नहीं है जब कांग्रेस के भीतर असंतोष खुलकर सामने आया हो। समय-समय पर कई वरिष्ठ नेताओं ने संगठन की कार्यशैली और नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। यदि ऐसे विवाद लगातार सार्वजनिक होते रहेंगे तो कार्यकर्ताओं में भ्रम और मतदाताओं के बीच अविश्वास बढ़ना स्वाभाविक है।
कांग्रेस के लिए यह समय आत्ममंथन का है। यदि पार्टी भविष्य के चुनावों में प्रभावी विकल्प बनना चाहती है तो उसे संवाद, पारदर्शिता और संगठनात्मक अनुशासन के बीच संतुलन स्थापित करना होगा। असहमति को दबाने के बजाय उसका समाधान संगठन के भीतर तलाशना होगा।
आखिरकार, जनता उस विपक्ष पर भरोसा करती है जो स्वयं संगठित, स्पष्ट और एकजुट दिखाई दे। यदि कांग्रेस अपनी अधिकांश ऊर्जा आंतरिक संघर्ष में ही खर्च करती रही, तो भाजपा को राजनीतिक चुनौती देने का उसका दावा कमजोर पड़ सकता है। यही कारण है कि आज सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि कांग्रेस भाजपा से कैसे लड़ेगी, बल्कि यह है कि क्या वह पहले अपने भीतर की लड़ाई खत्म कर पाएगी?


