भारत, रूस और चीन ने भेजे आधिकारिक प्रतिनिधि
तेहरान। ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्में तेहरान में शुरू हो गई हैं। अंतिम श्रद्धांजलि कार्यक्रम में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत देश की शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व मौजूद रहा। सुरक्षा कारणों के चलते खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई सार्वजनिक समारोह में शामिल नहीं हुए।
बताया गया कि अली खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हवाई हमले में मौत हुई थी। करीब 131 दिन बाद उन्हें उनके पैतृक शहर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि हुए शामिल
अंतिम संस्कार समारोह में दुनिया के 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने हिस्सा लिया। हालांकि भारत, रूस, चीन और तुर्किये ने अपने शीर्ष नेताओं को नहीं भेजा। इन देशों की ओर से आधिकारिक प्रतिनिधियों ने समारोह में भाग लिया।
भारत की ओर से विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व किया। वहीं पाकिस्तान, इराक, आर्मेनिया, ताजिकिस्तान और जॉर्जिया के शीर्ष नेता भी समारोह में मौजूद रहे।
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तेहरान में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
अंतिम संस्कार को लेकर तेहरान में सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है। राजधानी की प्रमुख सड़कों, सरकारी भवनों और महत्वपूर्ण चौराहों पर सेना और पुलिस की भारी तैनाती की गई है। संवेदनशील इलाकों में सैन्य वाहनों से लगातार निगरानी रखी जा रही है।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधाएं
सरकार ने अंतिम दर्शन के लिए आने वाले लोगों की सुविधा के लिए मेट्रो और सरकारी बस सेवाएं मुफ्त कर दी हैं। इसके अलावा होटल किराए में 50 प्रतिशत तक छूट, स्कूलों और मस्जिदों में ठहरने की व्यवस्था तथा अन्य शहरों से लोगों को लाने के लिए विशेष ट्रेनों का संचालन किया गया है।
5 शहरों से होकर गुजरेगी अंतिम यात्रा
अली खामेनेई की अंतिम यात्रा तेहरान से शुरू होकर कोम, फिर इराक के कर्बला और नजफ से होते हुए अंत में 9 जुलाई को मशहद पहुंचेगी, जहां उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
अंतिम संस्कार के बाद फिर शुरू हो सकती है अमेरिका-ईरान वार्ता
कतर के अधिकारियों के अनुसार, अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता का अगला दौर शुरू हो सकता है। हालांकि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को फोर्डो, नतांज और इस्फहान स्थित परमाणु ठिकानों के निरीक्षण की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।


