क्या महंगी होंगी हवाई यात्राएं?
मुंबई। भारत का विमानन उद्योग वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक के सबसे बड़े आर्थिक दबाव का सामना कर सकता है। रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA) ने घरेलू एयरलाइंस के शुद्ध घाटे का अनुमान बढ़ाकर 36 हजार से 38 हजार करोड़ रुपये कर दिया है। इससे पहले एजेंसी ने घाटा 11 से 12 हजार करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया था, लेकिन वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों में बदलाव के कारण तस्वीर पूरी तरह बदल गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लागत का दबाव इसी तरह बना रहा तो एयरलाइंस के सामने किराया बढ़ाने के अलावा सीमित विकल्प बचेंगे। हालांकि प्रतिस्पर्धा के कारण कंपनियां पूरी लागत यात्रियों पर नहीं डाल पा रही हैं।
रुपये की कमजोरी और महंगे ईंधन ने बढ़ाई मुश्किल
इक्रा के अनुसार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में आई गिरावट एयरलाइंस के लिए बड़ा झटका साबित हुई है। विमान लीज, रखरखाव और कई अन्य भुगतान डॉलर में होने के कारण कंपनियों पर विदेशी मुद्रा का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।
इसके साथ ही विमान ईंधन (एटीएफ) की ऊंची कीमतों ने परिचालन लागत में भारी इजाफा किया है। जून 2026 में एटीएफ की कीमतें पिछले साल की तुलना में करीब 26.9 प्रतिशत अधिक रहीं, जबकि वित्त वर्ष की पहली तिमाही में औसतन 22.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
नए विमान, बढ़ा लीज का खर्च
भारतीय एयरलाइंस लगातार नए विमान अपने बेड़े में शामिल कर रही हैं। इससे विमान लीज का खर्च भी तेजी से बढ़ा है। दूसरी ओर कंपनियां बढ़ती लागत के अनुरूप टिकट कीमतों में पूरी बढ़ोतरी नहीं कर पा रही हैं, जिससे मुनाफे पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
पश्चिम एशिया संकट का भी पड़ा असर
फरवरी 2026 से पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव का असर भारतीय विमानन उद्योग पर भी दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, उड़ान मार्गों में बदलाव और अंतरराष्ट्रीय परिचालन लागत बढ़ने से एयरलाइंस की वित्तीय स्थिति और कमजोर हुई है।
महंगे टिकट और बढ़ती महंगाई के कारण लोगों ने गैर-जरूरी हवाई यात्राओं में भी कटौती शुरू कर दी है, जिससे यात्री संख्या प्रभावित हो रही है।
यात्री वृद्धि के अनुमान में कटौती
इक्रा ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्री यातायात के अनुमान भी घटा दिए हैं।
घरेलू यात्री वृद्धि का अनुमान पहले 6 से 8 प्रतिशत था, जिसे घटाकर 3 से 6 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं अंतरराष्ट्रीय यात्री वृद्धि का अनुमान 8 से 10 प्रतिशत से घटाकर 0 से 3 प्रतिशत कर दिया गया है।
अप्रैल 2026 में भारतीय एयरलाइंस के अंतरराष्ट्रीय यात्री यातायात में सालाना आधार पर 39 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि मई 2026 में घरेलू यात्री संख्या बढ़कर 1.56 करोड़ पहुंच गई और पैसेंजर लोड फैक्टर 88.8 प्रतिशत रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर है।
क्या महंगे होंगे हवाई टिकट?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईंधन, लीज और विदेशी मुद्रा लागत में राहत नहीं मिलती है तो आने वाले महीनों में एयरलाइंस चरणबद्ध तरीके से टिकट किराए बढ़ा सकती हैं। हालांकि बाजार में प्रतिस्पर्धा और मांग में कमजोरी के कारण कंपनियां एक साथ बड़ी बढ़ोतरी करने से बच सकती हैं।
फिलहाल भारतीय विमानन उद्योग बढ़ती लागत, भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर मांग के बीच सबसे चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है। ऐसे में एयरलाइंस के लिए रिकॉर्ड घाटे से उबरना आसान नहीं होगा और इसका असर यात्रियों पर भी पड़ सकता है।


