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    ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, जन्म के आधार पर नागरिकता खत्म करने वाला आदेश रद्द; 14वें संशोधन को बरकरार रखा

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    वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मंगलवार को उस समय बड़ा कानूनी झटका लगा, जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जन्म के आधार पर नागरिकता (Birthright Citizenship) समाप्त करने संबंधी उनके कार्यकारी आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रंप का यह आदेश अमेरिकी कानून और संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है।

    यह कार्यकारी आदेश ट्रंप ने 20 जनवरी 2025 को अपने दूसरे कार्यकाल के पहले दिन जारी किया था। इसके जरिए अमेरिका में जन्म लेने वाले कुछ बच्चों को स्वतः नागरिकता मिलने के अधिकार को सीमित करने की कोशिश की गई थी।

    14वें संशोधन का हवाला

    सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों ने अपने फैसले में कहा कि ट्रंप का आदेश अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन का उल्लंघन करता है। इस संशोधन के तहत अमेरिका में जन्म लेने वाला लगभग हर व्यक्ति अमेरिकी नागरिक माना जाता है, चाहे उसके माता-पिता की नागरिकता या आव्रजन स्थिति कुछ भी हो।

    हालांकि, न्यायाधीश ब्रेट कैवनॉ ने अलग राय रखते हुए कहा कि यह आदेश संघीय कानून के खिलाफ है, लेकिन इसे सीधे तौर पर संविधान का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।

    ट्रंप बोले- कांग्रेस से बदलेंगे कानून

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि जन्म के आधार पर नागरिकता की व्यवस्था अमेरिका के लिए महंगी और अनुचित है। उन्होंने कहा कि इस फैसले को कांग्रेस के जरिए नया कानून बनाकर बदला जा सकता है और इसके लिए संविधान में संशोधन की जरूरत नहीं पड़ेगी।

    ट्रंप ने कांग्रेस से जल्द इस दिशा में कदम उठाने की अपील करते हुए कहा कि उन्हें इस पहल का पूरा समर्थन मिलेगा।

    लगातार तीसरा बड़ा झटका

    हाल के महीनों में सुप्रीम कोर्ट से ट्रंप को यह तीसरा बड़ा झटका मिला है। इससे पहले फरवरी में अदालत ने उनकी टैरिफ नीति को निरस्त कर दिया था। वहीं सोमवार को कोर्ट ने फेडरल रिजर्व की अधिकारी लीसा कुक को तत्काल पद से हटाने की उनकी कोशिश पर भी रोक लगा दी थी।

    दिलचस्प बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट के नौ न्यायाधीशों में से छह को रूढ़िवादी विचारधारा का माना जाता है, जिनमें ट्रंप द्वारा नियुक्त तीन न्यायाधीश भी शामिल हैं। इसके बावजूद इस मामले में अदालत ने उनके खिलाफ फैसला सुनाया।

    क्या है 14वां संशोधन?

    अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन वर्ष 1868 में लागू किया गया था। इसमें स्पष्ट प्रावधान है कि अमेरिका में जन्म लेने वाला और उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति अमेरिकी नागरिक होगा। इसी संवैधानिक व्यवस्था को Birthright Citizenship कहा जाता है। ट्रंप का कार्यकारी आदेश इसी प्रावधान की नई व्याख्या करने का प्रयास था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया।

    राजनीतिक असर

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला ट्रंप की आव्रजन नीति और 2026 के राजनीतिक एजेंडे के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। साथ ही, अमेरिका में नागरिकता और आव्रजन कानूनों को लेकर बहस आने वाले समय में और तेज होने की संभावना है।

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