भोपाल। भारत निर्वाचन आयोग ने मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा कर दी है। जारी कार्यक्रम के अनुसार 6 जुलाई को अधिसूचना जारी होगी, 13 जुलाई तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे, 14 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 16 जुलाई तक उम्मीदवार अपने नाम वापस ले सकेंगे। 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना कर परिणाम घोषित किए जाएंगे। निर्वाचन प्रक्रिया 4 अगस्त तक पूरी कर ली जाएगी।
चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही दतिया विधानसभा क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान सभी केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और वीवीपैट के माध्यम से कराया जाएगा।
राजनीतिक रूप से अहम है दतिया सीट
दतिया विधानसभा सीट इस बार राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र भारती ने तत्कालीन प्रदेश के गृह मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा को कड़े मुकाबले में पराजित कर बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया था। इस हार के बाद नरोत्तम मिश्रा विधानसभा से बाहर हो गए थे। अब उपचुनाव को भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई माना जा रहा है।
क्यों खाली हुई दतिया विधानसभा सीट?
दतिया विधानसभा सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद रिक्त हुई। बैंक एफडी से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में उन्हें तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3), संविधान के अनुच्छेद 191(1)(e) तथा सुप्रीम कोर्ट के लिली थॉमस फैसले के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता स्वतः समाप्त हो गई। इसके बाद मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने सीट रिक्त घोषित कर निर्वाचन आयोग को इसकी सूचना भेज दी।
क्या है पूरा मामला?
मामला वर्ष 1998 में दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक में कथित एफडी फर्जीवाड़े से जुड़ा है। आरोप है कि बैंक रिकॉर्ड में हेरफेर कर एक फिक्स्ड डिपॉजिट की अवधि तीन वर्ष से बढ़ाकर 15 वर्ष कर दी गई, जिसके आधार पर वर्षों तक ब्याज की राशि निकाली जाती रही। उस समय राजेंद्र भारती बैंक के अध्यक्ष और संबंधित संस्था के ट्रस्टी भी थे।
दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने 1 अप्रैल 2026 को उन्हें दोषी ठहराया और 2 अप्रैल को तीन वर्ष के कारावास तथा एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई।
तत्काल क्यों गई सदस्यता?
सुप्रीम कोर्ट के 2013 के लिली थॉमस फैसले के अनुसार यदि किसी सांसद या विधायक को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होती है तो उसकी सदस्यता तत्काल समाप्त हो जाती है। केवल अपील दायर करने से सदस्यता बहाल नहीं होती, बल्कि उच्च न्यायालय से दोषसिद्धि या अयोग्यता पर रोक मिलना आवश्यक होता है।
दतिया उपचुनाव के ऐलान के साथ ही प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। दोनों प्रमुख दलों ने चुनावी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है और आने वाले दिनों में उम्मीदवारों के चयन के साथ चुनावी मुकाबला और दिलचस्प होने की संभावना है।
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